India GDP Growth: डेलॉयट इंडिया के अनुसार निजी निवेश में सुधार और मजबूत खपत के बल पर वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.1 से 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।India GDP Growth : भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले समय में और मजबूत रफ्तार पकड़ने के लिए तैयार है। वैश्विक सलाहकार फर्म डेलॉयट इंडिया (Deloitte India) की लेटेस्ट आर्थिक आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 7.1 से 7.3 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। वहीं, इसके अगले वित्त वर्ष 2027-28 में यह 6.6 से 7.0 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि निजी निवेश में टिकाऊ सुधार से बाजार में अतिरिक्त मांग पैदा होगी, जिससे देश की उत्पादन क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।
घरेलू खपत और बुनियादी ढांचे ने दी आर्थिक मजबूती
डेलॉयट की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक वृद्धि मुख्य रूप से मजबूत घरेलू खपत और बुनियादी ढांचे में सरकारी निवेश के दम पर आगे बढ़ी है। हालांकि, देश में बेहतर कनेक्टिविटी, व्यापारिक परिस्थितियों में सुधार और कॉर्पोरेट जगत के मजबूत वित्तीय संतुलन के बावजूद निजी निवेश को गति पकड़ने में उम्मीद से थोड़ा अधिक समय लगा है। लेकिन अब स्थितियां तेजी से बदल रही हैं और निजी क्षेत्र निवेश के लिए आगे आ रहा है।
निजी क्षेत्र के विस्तार के लिए स्थितियां अनुकूल
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक डेलॉयट इंडिया की मुख्य अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारत की विकास दर मजबूत पारिवारिक खर्च और सरकारी बुनियादी ढांचे पर निरंतर जोर के कारण स्थिर रही है। अब कंपनियों के पास बेहतर कनेक्टिविटी, मजबूत बैलेंस शीट और उच्च क्षमता उपयोग है, जिससे व्यापार विस्तार का आधार मजबूत हुआ है।उन्होंने बताया कि हालिया आर्थिक आंकड़े काफी उत्साहजनक हैं। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (GFCF) में 11.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो पिछले चार वर्षों में सबसे तेज गति है। इसके अलावा, उद्योगों में क्षमता उपयोग लगातार छह तिमाहियों से 75.7 प्रतिशत से ऊपर बना हुआ है, जिससे कंपनियों के लिए नई फैक्ट्रियां और उपकरण लगाने का कारण और मजबूत हो जाता है।
उद्योगों में क्रेडिट ग्रोथ और उत्पादन में तेजी
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि औद्योगिक क्षेत्र में ऋण वृद्धि (Credit Growth) 20 प्रतिशत के अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। इसके साथ ही सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSMEs) में भी लोन की मांग तेजी से बढ़ रही है। कैपिटल गुड्स (पूंजीगत वस्तुओं) के उत्पादन, मशीनरी के ऑर्डर और उपकरणों की खरीदारी में बढ़ोतरी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि निवेश के फैसले अब धरातल पर उतरने लगे हैं। ऊर्जा, संसाधन और मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ आईटी क्षेत्र में भी निवेश बढ़ रहा है।
रणनीतिक क्षेत्रों में बड़ा निवेश और वैश्विक चुनौतियां
सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा निर्माण, स्वच्छ ऊर्जा और एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भारी अग्रिम निवेश की जरुरत होती है, जो आर्थिक गति को और बढ़ा सकते हैं। हालांकि, डेलॉयट ने सचेत किया है कि भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव और व्यापारिक बाधाएं आर्थिक परिदृश्य के लिए जोखिम बनी हुई हैं। इसके अलावा, वैश्विक झटकों और शुल्क अनिश्चितताओं के कारण कुछ कंपनियों ने बड़े फैसलों को टाला भी है।
रिपोर्ट के अंत में सुझाव दिया गया है कि निवेश निर्णयों को जल्द से जल्द चालू परियोजनाओं में बदलने के लिए तेज भूमि अधिग्रहण, अनुमानित मंजूरियों, भरोसेमंद उपयोगिताओं और प्रभावी अनुबंध प्रवर्तन की जरुरत होगी। इसमें राज्य और स्थानीय सरकारों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगी।







































