सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) पर की गई टिप्पणियों को लेकर शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत और पत्रकार निखिल वाग्ले के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर नोटिस जारी किया है।सुप्रीम कोर्ट ने CJI के खिलाफ की गई टिप्पणियों को लेकर पत्रकार निखिल वागले और शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत को अवमानना का नोटिस जारी किया है। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने दाखिल की है। गुरुवार को ही AG ने अवमानना की कार्रवाई के लिए लिए मंजूरी दी थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की व्यक्तिगत पेशी की मांग को ठुकराया, पूछा सवाल कि क्यों न दोनों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाए
सुनवाई के दौरान SCBA प्रेसिडेंट प्रदीप राय ने कहा कि इस मामले में याचिका दायर करना उनके लिए दुख की बात है। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति जिम्मेदार पत्रकार हैं, जबकि दूसरे संसद के सदस्य हैं। सीनियर एडवोकेट वकील प्रदीप राय ने कहा कि दोनों की व्यक्तिगत मौजूदगी जरूरी होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि आखिरकार SCBA ने यह सोचा कि अगर इस तरह की टिप्पणियों को अभी नजरअंदाज कर दिया गया, तो इससे दूसरे लोगों को भी ऐसा करने के लिए बढ़ावा मिल सकता है।
सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि लोग यह नहीं समझते कि उन्हें किस तरह फंसाया जा रहा है। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कई लोग सब कुछ समझते हैं और जानबूझकर ऐसा करते हैं। उन्हें लगता है कि इससे अदालत पर दबाव बनेगा, जबकि अदालत पर दबाव बनाने की ऐसी कोशिश बेकार साबित हो सकती है।CJI ने कहा कि अदालतों ने हमेशा लोगों के अधिकारों की रक्षा की है और इस काम में कभी पीछे नहीं रही हैं। इसके बावजूद अगर अदालतों की लगातार निंदा की जाती है, तो यह बहुत दुख की बात है। CJI ने उम्मीद जताई कि सभी लोग बेहतर समझदारी दिखाएंगे।










































