Who Is IPS Narendra Rawat: राहुल गांधी के कार्यक्रम के बाद इंदौर के डीसीपी नरेंद्र रावत की चर्चा है। फर्ज निभाते हुए कांग्रेस नेताओं से उनका विवाद हो गया था। पुलिस एसोसिएशन उनके समर्थन में है। आइए बताते हैं कि आईपीएस नरेंद्र रावत कौन इंदौर: छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान इंदौर के डीसीपी नरेंद्र रावत की ड्यूटी लगी थी। वह अपनी ड्यूटी निभा रहे थे। पंडाल के अंदर भीड़ बढ़ी तो वह खुद मोर्चे पर खड़े हो गए और लोगों को नियंत्रित करने लगे। इस दौरान कांग्रेस नेताओं के साथ उनकी तीखी बहस हो गई। घटना के बाद भी कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने विवादित बयान दिया था। डीसीपी नरेंद्र रावत के समर्थन में पुलिस एसोसिएशन खड़ी हो गई है।क्या था मामला
दरअसल, इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में मंच प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी इंदौर शहरी पुलिस के डीसीपी नरेंद्र रावत को सौंपी थी। कार्यक्रम के दौरान पंडाल में भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे व्यवस्थाएं प्रभावित हुईं। अधिकारी पूर्व-जारी आधिकारिक दिशानिर्देशों का पालन करते हुए अपने आधिकारिक कर्तव्यों के तहत भीड़ को नियंत्रित कर रहे थे। इसी दौरान कुछ विवाद हो गया।
कई अधिकारी आए और गए
डीसीपी और कार्यक्रम के आयोजकों के बीच मंच पर हुई झड़प पर प्रतिक्रिया देते हुए सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि एक साधारण अधिकारी ‘सिंघम’ की तरह व्यवहार कर रहा है, यह समझे बिना कि यह इंदौर है, जहां ऐसे कई अधिकारी आए और चले गए हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अधिकारी को समझना चाहिए कि सरकारें बदलती रहती हैं।पुलिस एसोसिएशन ने दिया साथ
कांग्रेस नेताओं की बयानबाजी पर पुलिस एसोसिएशन ने इस बात पर जोर दिया गया कि पुलिसकर्मी आधिकारिक निर्देशों के तहत अपनी सौंपी गई जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे थे। इसमें कर्तव्य का निर्वहन कर रहे एक अधिकारी के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा पर चिंता व्यक्त की गई और निर्वाचित प्रतिनिधियों से आग्रह किया गया कि वे लोक सेवकों से बातचीत करते समय या उन पर टिप्पणी करते समय मर्यादा बनाए रखें।
जीतू पटवारी के भाई पर भी लिया था एक्शन
वहीं, इंदौर में जीतू पटवारी के भाई के खिलाफ भी ड्रग्स केस में आईपीएस नरेंद्र रावत ने ही एक्शन लिया था। भारी राजनीतिक दबाव के बीच उन्होंने कार्रवाई की थी। साथ ही अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया था। कौन हैं आईपीएस नरेंद्र रावत
आईपीएस नरेंद्र रावत की इंदौर में अलग छवि है। वह पुलिस उपायुक्त के पद पर पदस्थ हैं। बेहद कम दिनों में उन्होंने अलग छाप छोड़ी है। वह 2021 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। नरेंद्र रावत मूल रूप से मध्य प्रदेश के शिवपुरी के रहने वाले हैं।
आईआईटी से किया है बीटेक
इंदौर डीसीपी ने आईआईटी से बीटेक किया है। इसके बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी। 2019 में उनका चयन भारतीय वन सेवा में हुआ था। इसके बाद भी उन्होंने तैयारी जारी रखी। इसके बाद आईपीएस बने हैं।इन अहम पदों पर दे चुके हैं सेवा
आईपीएस अफसर नरेंद्र रावत पहले सागर जिले सुर्खी थाने में सेवा दे चुके हैं। इसके बाद बैतूल के मुलताई में एसडीओपी बने थे। फिर राज्यपाल के एडीसी भी रहे हैं। उनकी छवि एक निर्विवाद अफसर के रूप में रही है।
पिता हैं किसान
वहीं, आईपीएस अफसर नरेंद्र रावत के पिता किसान हैं। उन्होंने खुद 10वीं तक पढ़ाई की है। नरेंद्र रावत रेलवे में फाइनेंस कमिश्नर भी रह चुके हैं। 2009 में उन्हें आईआईटी में दाखिल मिला था। केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है।










































