वारासिवनी। स्वास्थ्य सुविधाओं और आपातकालीन सेवाओं की बदहाली ने एक बार फिर एक हंसते-खेलते परिवार का चिराग बुझा दिया। वारासिवनी क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत रामपायली निवासी 25 वर्षीय सुजल खरोले की शुक्रवार को उस समय मौत हो गई, जब उन्हें बेहतर उपचार के लिए बालाघाट ले जाया जा रहा था। परिजनों का आरोप है कि एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होना और दूसरे सिलेंडर का लीकेज होना युवक की मौत का मुख्य कारण बना।
कॉलेज से लौटते ही बिगड़ी तबीयत
प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक सुजल 25 वर्ष पिता बलदेव खरोले सरदार पटेल कॉलेज का छात्र था। शुक्रवार 17 अप्रैल को वह हमेशा की तरह कॉलेज गया था। दोपहर करीब 3:00 बजे घर लौटने के बाद उसे अचानक तेज बुखार आया और स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ने लगा। परिजन उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामपायली लेकर पहुंचे। वहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे जिला मुख्यालय बालाघाट रेफर कर दिया।
प्राइवेट एंबुलेंस की बदहाली बनी काल
परिजनों ने बताया कि उस समय सरकारी संजीवनी 108 एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी। युवक को सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही थी जिसके कारण परिजनों ने आनन-फानन में रामपायली के ही एक निजी डॉक्टर राय की प्राइवेट एंबुलेंस क्रमांक एमपी 50 डीए 0192 बुक की। आरोप है कि एंबुलेंस में रखे एक सिलेंडर में ऑक्सीजन पहले ही खत्म हो चुकी थी। जब दूसरा सिलेंडर लगाने की कोशिश की गई, तो वह लीकेज निकला।
रास्ते में ही थम गईं सांसें
परिजनों का आरोप है कि ऑक्सीजन की समुचित व्यवस्था न होने के कारण सुजल की स्थिति रास्ते में और खराब हो गई। वारासिवनी के समीप पहुंचते-पहुंचते युवक ने दम तोड़ दिया। एंबुलेंस चालक युवक को लेकर सिविल अस्पताल वारासिवनी पहुंचा जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
25 मिनट तक बंद रही ऑक्सीजन – बिलखती मां का बयान
मृतक की मां कौतिका खरोले ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई उन्होंने बताया मेरा बेटा सुबह 9:00 बजे कॉलेज गया था और 2:00 बजे घर लौटा। घर आते ही उसे तेज बुखार आया। हमने सोचा सामान्य बुखार है और उसे पेरासिटामोल दी, लेकिन तबीयत और बिगड़ गई। डॉक्टर के पास ले जाने पर एंबुलेंस में ऑक्सीजन की सप्लाई करीब 25 मिनट तक बंद रही। रास्ते में दोबारा ऑक्सीजन बंद हो गई। अगर समय पर सही सिलेंडर मिल जाता तो मेरा बेटा आज जिंदा होता।
व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
इस हृदयविदारक घटना ने क्षेत्र की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल दी है। एक तरफ सरकारी एंबुलेंस की अनुपलब्धता और दूसरी तरफ निजी एंबुलेंस संचालकों की भारी लापरवाही ने एक होनहार छात्र की जान ले ली। ग्रामीणों और परिजनों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी एंबुलेंस संचालक के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की है।










































