नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को Su-57 पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट पर साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने भारत को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने की भी बात कही है। इससे एक बार फिर उस बहस को हवा मिली है जिसके तहत भारत में कम से कम 10 वर्षों से इस स्टील्थ जेट को खरीदने की बात चल रही है। पुतिन ने बताया कि रूस ने पहले भी भारत के सामने इस फाइटर जेट को मिलकर बनाने का प्रस्ताव रखा था लेकिन नई दिल्ली ने इंतजार करने और स्थिति को समझने का फैसला किया जबकि मॉस्को ने अकेले ही इस पर काम जारी रखा।
पुतिन उस FGFA प्रोजेक्ट की बात कर रहे हैं जिसे भारत और रूस ने मिलकर शुरू किया था लेकिन 2018 में भारत इस प्रोग्राम से बाहर आ गया। हालांकि अब ये फाइटर जेट ऑपरेशनल हो चुका है तो रूस एक बार फिर से इसे बेचने की कोशिश कर रहा है। क्रेमलिन बार बार भारत के सामने Su-57 का प्रस्ताव रख रहा है जिसमें न सिर्फ इसे खरीदने के लिए बल्कि भविष्य में इसके विकास और उत्पादन के लिए भी। रूस ने भारत को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ साथ सोर्स कोड देने की भी बात कही है लेकिन एक वक्त रूस ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया था।








































