भोपाल: मध्य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग के तहत आने वाले सरकारी मेडिकल कॉलेजों के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के सामने एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। राज्य सरकार ने कई विभागों के लिए ऑनलाइन ट्रांसफर विंडो तो खोल दी है, लेकिन चिकित्सा शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण हजारों कर्मचारी इसमें आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। दरअसल, ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए एक अनिवार्य ‘एम्प्लॉई कोड’ की आवश्यकता होती है, जो विभाग ने इन कर्मचारियों को आज तक जारी ही नहीं किया है। इसके चलते वे सिस्टम से पूरी तरह बाहर हो गए हैं।
पेंशन और ग्रेच्युटी पर भी संकट
एमपी मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (MTA) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राकेश मालवीय ने इस व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने चेतावनी दी कि एम्प्लॉई कोड न होने का असर सिर्फ तबादलों पर ही नहीं पड़ रहा, बल्कि सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) हो चुके कर्मचारियों की पेंशन और ग्रेच्युटी मिलने में भी भारी देरी हो रही है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर एसोसिएशन के सदस्यों ने पिछले महीने अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) अशोक वर्णवाल से मुलाकात की थी। एसीएस ने कोड जारी करने पर सहमति जताते हुए फाइल को वित्त विभाग के पास भेजा था, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला।स्वायत्त होने के बाद नियुक्त हुए थे
साल 2005 में मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों को स्वायत्त (ऑटोनॉमस) दर्जा दिया गया था। इसके बाद नियुक्त हुए अधिकांश कर्मचारी इस कोड के हकदार हैं। वर्तमान में प्रदेश के कुल 22 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत लगभग 5,000 डॉक्टर, 3,000 से अधिक नर्सें और करीब 1,500 फार्मासिस्ट व क्लर्क इस समस्या से सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं।
अब परेशान और नाराज डीएमई स्टाफ सरकार से मांग कर रहा है कि उनके लिए या तो एक अलग ट्रांसफर पोर्टल खोला जाए, या फिर वर्तमान सिस्टम में कोई अस्थायी बदलाव किया जाए ताकि वे बिना एम्प्लॉई कोड के भी अपना ट्रांसफर आवेदन जमा कर सकें।










































