चीन का 80% तेल जहां से गुजरता है, भारत ने उस गेट के पास खड़े कर दिए तीन युद्धपोत, दुश्मन को चुभता है

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नई दिल्ली: 2003 की बात है, जब चीन में हू जिंताओ राष्ट्रपति हुआ करते थे। उन्हें एक बात खाए जा रही थी कि मलक्का स्ट्रेट चीन को बड़ी टेंशन दे रहा है। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के एक आयोजन में जिंताओ यह चिंता जता रहे थे। उसकी वजह यह थी कि वह समंदर में मलक्का की खाड़ी पर न तो कब्जा कर पा रहे थे और न ही इसे आसानी से नजरअंदाज कर पा रहे थे। जिंताओ ने अपने उस भाषण में इसे ‘मलक्का दुविधा’ करार दिया था। अब इसी मलक्का के दरवाजे के पास भारत एक रणनीतिक ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने में लगा है। यह प्रोजेक्ट भारत को जहां रणनीतिक बढ़त देने वाला है, वहीं चीन की भी टेंशन बढ़ा रहा है। ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का कांग्रेस के राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी भी विरोध कर रहे हैं। वहीं, बीजेपी ने भी राहुल को करारा जवाब दिया है।ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट: चीन की बड़ी चिंता क्या है

स्ट्रेट ऑफ मलक्का का सबसे ज्यादा संकरा पॉइंट 2.8 किलोमीटर चौड़ा है। यहां से पूरी दुनिया का करीब 3.5 ट्रिलियन डॉलर का कारोबार गुजरता है। यहीं से चीन का कुल समुद्री यातायात का करीब दो-तिहाई गुजरता है। मलक्का चीन के लिए कितना महत्वपूर्ण है, इसे ऐसे समझिए कि यहां से हर दिन चीन का 1.5 करोड़ बैरल तेल गुजरता है।

जिंताओ के उस बयान के करीब 22 साल बाद चीन की समस्या और बढ़ती ही गई। 2025 में चीन का कुल तेल आयात का करीब 80 फीसदी इसी मलक्का स्ट्रेट के जरिये होता रहता है। इस तेल की कीमत 312 बिलियन डॉलर सालाना बैठती है।

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