जनगणना में भी ओबीसी वर्ग के साथ किया जा रहा अन्याय

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पदमेश न्यूज़, बालाघाट।देश में लंबे समय से विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा ओबीसी की जनगणना कराए जाने की मांग की जा रही है, लेकिन आजादी के बाद से ही देश में ओबीसी की जातिगत जनगणना नहीं कराई गई हैं।ब्रिटिश हुकूमत ने 1871 से 1931 तक जातिगत जनगणना कराई, लेकिन आजादी के बाद ओबीसी की जातिगत जनगणना नहीं कराई गई।जिसके चलते जनसंख्या के आधार पर ओबीसी को उनका हक और अधिकार नहीं मिल पा रहा था।जनसंख्या के आधार पर ओबीसी को आरक्षण और सभी वर्ग क्षेत्रो हिस्सेदारी ना मिलने पर विगत कई वर्षों से सामाजिक संगठनों द्वारा ओबीसी की जनगणना कराए जाने की मांग की जा रही है। जिसे देखते हुए देश मे जनगणना का कार्य तो शुरू कर दिया गया है।लेकिन जनगणना के फार्म में ओबीसी का कालम ही नही रखा गया है।जहां ओबीसी वर्ग को सामान्य में गिना जा रहा है।इस पर आपत्ति जताते हुए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग(ओबीसी) मोर्चा द्वारा सरकार के खिलाफ शुरू किया गया चरणबद्ध आंदोलन सोमवार को भी देखने को मिला है।जिसके तीसरे व अंतिम चरण के तहत सोमवार 22 जून को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग(ओबीसी) मोर्चा द्वारा नगर के अंबेडकर चौक में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर अपनी इस प्रमुख मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की गई।इस दौरान पदाधिकारियो ने केंद्र सरकार पर ओबीसी का हक मारने का आरोप लगाते हुए धरना स्थल से नगर में एक रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय में एक ज्ञापन सौपा है।जिसमे उन्होंने जनगणना के फार्म में ओबीसी का कालम जोड़ने और ओबीसी वर्ग के सही आंकड़े जारी कर, जनसख्या के हिसाब से ओबीसी वर्ग को नौकरी में आरक्षण देते हुए सभी क्षेत्रो में ओबीसी वर्ग को आरक्षण देकर ओबीसी वर्ग को जनसख्या के अनुपात में हिस्सेदारी दिए जाने की मांग की है।

ओबीसी वर्ग को मिले उसका हक और अधिकार
पदाधिकारियों ने बताया कि हमने हमेशा संविधान के दायरे में रहकर अपने हक की लड़ाई लड़ी है।ओबीसी जनगणना, केवल आंकड़े नहीं बल्कि करोड़ों लोगों के हक, अधिकार और पहचान का सवाल है।ओबीसी समुदाय के इस हक -अधिकार के लिए कई बार धरना प्रदर्शन आंदोलन आवेदन निवेदन कर ज्ञापन सौपा गया है।इस जनगणना में ओबीसी वर्ग का कालम ना होने के चलते,ओबीसी वर्ग को हर क्षेत्र में काफी नुकसान हो रहा है और उन्हें जनसंख्या के आधार पर उनका हक अधिकार नहीं मिल पा रहा हैं।हमारी मांग है कि जनगणना के आंकड़े पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक किए जाए।ओबीसी वर्ग को जनसंख्या के अनुपात में हिस्सेदारी दी जाए और केंद्र व राज्य स्तर पर नीति निर्धारण में ओबीसी वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।ताकि जनसंख्या के आधार पर ओबीसी वर्ग को हर क्षेत्र में आरक्षण मिल सके।

जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी चाहिए
पदाधिकारियों ने, जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी का नारा बुलंद करते हुए ओबीसी जनगणना और जन संख्या के आधार पर आरक्षण दिए जाने की मांग की है। जिन्होंने स्पष्ट कर दिया कि 15 प्रतिशत लोग ,85 प्रतिशत लोगों पर राज नहीं करेंगे। जिन्होंने केवल सरकारी नौकरी ही नहीं बल्कि शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक सहित अन्य क्षेत्रों में भी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिए जाने की मांग की है।वहीं उन्होंने इस मांग को लेकर पूरे देश में सड़को पर उतरकर आंदोलन किए जाने की चेतावनी दी है।

जनसंख्या के आधार पर हर क्षेत्र में दिया जाए प्रतिनिधित्व-
पदाधिकारियो ने बताया कि पूरे देश में ओबीसी का प्रतिशत अधिक होने के बावजूद उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है। जिसके चलते कैसे ओबीसी वर्ग के लिए योजना बनेगी और कैसे उन्हें लाभ मिलेगा। देश में सबसे ज्यादा ओबीसी समाज होने के बावजूद कार्यपालिका न्यायापालिका व कर्मचारियों की संख्या में ओबीसी का प्रतिशत ना के बराबर है। उन्होंने मांग की कि सरकार ओबीसी की जनगणना कराकर उसे हर क्षेत्र प्रतिनिधित्व दे।अब हम सामाजिक शोषण बर्दाश्त नहीं करेंगे।हमें जनसंख्या के आधार पर राजनीति, सरकारी नौकरी, आर्थिक, शैक्षणिक, रोजगार सहित अन्य क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व चाहिए।

तो पूरे देश में किया जाएगा बड़ा आंदोलन- सदाशिव हरिनखेड़े
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग ओबीसी मोर्चा जिला अध्यक्ष सदाशिव हरिनखेड़े ने बताया कि अभी जो जनगणना हो रही है उसमें ओबीसी का कालम नहीं दिया गया है ऐसे में ओबीसी वर्ग को सामान्य वर्ग में गिना जा रहा है जब ओबीसी वर्ग का जनगणना में कालम ही नहीं होगा तो फिर ओबीसी के लिए बजट कहां से आएगा देश को आजाद हुए करीब 80 वर्ष बीत गए आज तक आजादी के बाद से ओबीसी की जाति आधारित जनगणना नहीं हुई है,जनगणना में एससी एसटी का कॉलम तो है लेकिन ओबीसी का कालम नहीं है जिसे लागू करने की मांग संगठन द्वारा की जा रही है।,इसी को लेकर संगठन द्वारा चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया गया है,इसके बाद भी यदि मांग पूरी नहीं होती तो पूरे देश में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
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