जल्द बाजार में आएंगे 100% मेड इन इंडिया मोबाइल फोन, सरकार की नई योजना से भारतीय ब्रांडों को मिलेगा बढ़ावा

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उन्होंने कहा कि कंपनियों का डिजाइन पूरी तरह उनका अपना होना चाहिए और उन्हें यह साबित करना होगा कि उस डिजाइन का IPR उनके पास है। सरकार भारतीय मोबाइल ब्रांडों के डिजाइन का मूल्यांकन करते समय गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं करेगी।भारत में जल्द ही ऐसे मोबाइल फोन बाजार में देखने को मिल सकते हैं, जिन्हें भारतीय कंपनियां खुद डिजाइन करेंगी और जिनके डिजाइन से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) भी उन्हीं कंपनियों के पास होंगे। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कहा कि अगले 10 से 14 महीनों में भारतीय डिजाइन और बौद्धिक संपदा वाले मोबाइल फोन बाजार में आने की उम्मीद है। इन फोन को 62,500 करोड़ रुपये की ‘मोबाइल फोन विनिर्माण योजना’ (MPMS) के तहत बढ़ावा दिया जाएगा।

मोबाइल का डिजाइन खुद का होना जरूरी

MPMS की अधिसूचना जारी होने के मौके पर अश्विनी वैष्णव ने कहा कि योजना के तहत आवेदन करने वाली कंपनियों को यह साबित करना होगा कि मोबाइल फोन के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले डिजाइन के बौद्धिक संपदा अधिकार उनके पास हैं। सरकार भारतीय ब्रांड विकसित करने के लिए डिजाइन के मामले में किसी तरह की नकल को स्वीकार नहीं करेगी।

PTI/भाषा के मुताबिक उन्होंने कहा कि कंपनियों का डिजाइन पूरी तरह उनका अपना होना चाहिए और उन्हें यह साबित करना होगा कि उस डिजाइन का IPR उनके पास है। सरकार भारतीय मोबाइल ब्रांडों के डिजाइन का मूल्यांकन करते समय गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं करेगी।तीन कंपनियों में दिख रही उम्मीद

अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, सरकार को फिलहाल तीन ऐसी कंपनियों में क्षमता नजर आ रही है, जो अगले 10 से 14 महीनों में इस क्षेत्र में अपने उत्पाद पेश कर सकती हैं। इन कंपनियों को अपने डिजाइन के विकल्प पेश करने होंगे और उनके उत्पादों का स्तर अपने क्षेत्र के बेहतरीन उत्पादों के बराबर होना चाहिए। फिलहाल भारत में ऐसा कोई मोबाइल फोन नहीं है जिसे पूरी तरह देश में डिजाइन किया गया हो। हालांकि, घरेलू कंपनियां Lava International और AI+ अपने स्मार्टफोन को स्थानीय स्तर पर डिजाइन करने का दावा करती हैं।

62,500 करोड़ रुपये की योजना में दो हिस्से

मोबाइल फोन विनिर्माण योजना यानी MPMS को दो हिस्सों में बांटा गया है। इसमें टारगेट सेगमेंट-1 (TS1) और टारगेट सेगमेंट-2 (TS2) शामिल हैं। TS1 का उद्देश्य मोबाइल फोन के विनिर्माण को बढ़ावा देना है, जबकि TS2 के जरिए भारतीय मोबाइल फोन ब्रांडों को समर्थन दिया जाएगा। TS1 के तहत मोबाइल फोन कंपनियां और कॉन्ट्रैक्ट इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां योजना का लाभ ले सकती हैं, बशर्ते उनका पिछले वित्त वर्ष में कारोबार कम से कम 10,000 करोड़ रुपये रहा हो।

भारतीय स्वामित्व वाली कंपनियों को मिलेगा फायदा

TS2 के तहत आवेदन करने वाली कंपनियों में कम से कम 51 फीसदी भारतीय स्वामित्व होना जरूरी है। इसके अलावा वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का कारोबार कम से कम 1,000 करोड़ रुपये होना चाहिए। इस हिस्से का मुख्य फोकस ऐसे भारतीय मोबाइल ब्रांड तैयार करना है, जिनके अपने उत्पाद और डिजाइन हों और जो आगे चलकर वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें।

चीनी कंपनियों से मुकाबले के बीच भारतीय ब्रांडों पर जोर

वैष्णव ने कहा कि भारत में पहले भी मोबाइल फोन निर्माण का एक मजबूत माहौल था, लेकिन टैक्स से जुड़े मुद्दों और चीनी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण भारतीय कंपनियों के लिए बाजार में टिके रहना मुश्किल हो गया था। अब देश में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का इकोसिस्टम दोबारा मजबूत हो चुका है और सरकार का फोकस भारतीय ब्रांडों को विकसित करने पर है।

PLI योजना के बाद शुरू हुई MPMS

मोबाइल फोन से जुड़ी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना की अवधि मार्च 2026 में समाप्त होने के बाद MPMS को पेश किया गया है। यह योजना चालू वित्त वर्ष से शुरू होकर पांच साल तक लागू रहेगी। योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार, मौजूदा मोबाइल ब्रांडों को इसका लाभ लेने के लिए हर साल वित्त वर्ष 2025-26 के कारोबार से कम से कम 5,000 करोड़ रुपये अधिक की बिक्री का न्यूनतम स्तर हासिल करना होगा। वहीं, नए ब्रांडों के लिए योजना के तहत पात्र होने के लिए भारत में सालाना कम से कम 10,000 करोड़ रुपये की बिक्री जरूरी होगी।

भारत को ग्लोबल प्रोडक्ट मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि सरकार भारतीय ब्रांडों को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए तकनीकी संप्रभुता और रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर दे रही है। इसका उद्देश्य भारत में सिर्फ मोबाइल असेंबल करना नहीं, बल्कि अपने उत्पाद, तकनीक और बौद्धिक संपदा विकसित करना है।

MPMS को एक परियोजना प्रबंधन एजेंसी के माध्यम से लागू किया जाएगा। मंत्रालय योजना के क्रियान्वयन से जुड़े विस्तृत दिशानिर्देश अलग से जारी करेगा। सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से भारत में भारतीय स्वामित्व वाले मोबाइल ब्रांडों के विकास को बढ़ावा मिलेगा और देश वैश्विक स्तर पर उत्पाद डिजाइन और निर्माण के क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा

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