केंद्र सरकार की 5 और 6 अगस्त, 2016 को भारत में मेटा की ग्लोबल टीम के साथ मीटिंग होने वाली है। IT सेक्रेटरी एस. कृष्णन ने बताया कि मेटा की ग्लोबल टीम और भारत सरकार के बीच होने वाली इस बैठक में कई अहम मुद्दों पर बातचीत की जाएगी। इन मुद्दों में बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े कंटेंट (CSEAM) को लेकर प्लेटफॉर्म का रवैया, जाने-माने वेरिफाइड अकाउंट्स पर अस्थायी रोक और AI से बने कंटेंट का फैला शामिल होगा। इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी मेटा (Meta) मुश्किल में फंस गई है। उस पर आरोप है कि इंस्टाग्राम पर पैसे देकर चलाए जाने वाले विज्ञापनों यानी पेड ऐड्स के जरिए बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार (CSEAM) से जुड़ा कंटेंट प्रमोट हो रहा था। साथ ही, एआई कंटेंट के जरिए गलत जानकारियां फैलाईं जा रही हैं।
सरकार का बड़ा एक्शन
इस गंभीर मामले के सामने आने के बाद सरकारी एजेंसियां और रेगुलेटर्स मेटा के खिलाफ कड़ा एक्शन ले रहे हैं और जांच कर रहे हैं कि उनकी विज्ञापन सिस्टम में ऐसी बड़ी लापरवाही कैसे हुई। सरकार ने पहले भी इस मुद्दे पर कंपनी को नोटिस भेजा था। यह कदम तब उठाया गया है, जब कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक फेसबुक पोस्ट थोड़ी देर के लिए हटा दिया गया था। उस पोस्ट में उन्होंने पेपर लीक को लेकर छात्रों की चिंताओं पर बात की थी।
क्यों फेल हुआ मेटा का सिस्टम?
IIT मद्रास में AI4Bharat और Josh Talks AI के एक इंडिपेंडेंट मल्टीमॉडल AI इवैल्यूएशन प्लेटफॉर्म के लॉन्च के मौके पर कृष्णन ने कहा कि सरकार यह समझना चाहती है कि इन मामलों में मेटा के सिस्टम क्यों फेल हुए और कंपनी को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कृष्णन ने कहा कि हम मेटा से यह समझना चाहेंगे कि इनमें से कुछ चीजें उस तरह से क्यों काम नहीं कर रही हैं, जैसा उन्हें करना चाहिए और चुनौतियां क्या हैं।
गलत जानकारी पर रोक लगाना मकसद
इसे देखकर लग रहा है कि सरकार यह गहराई से समझना चाहती है कि आधुनिक AI तकनीकों के दौर में भी मेटा के सुरक्षा सिस्टम और एल्गोरिदम बच्चों के शोषण से जुड़े कंटेंट को रोकने में क्यों नाकाम रहे। इसके साथ ही, AI तकनीक के जरिए फैलने वाली गलत जानकारी और वेरिफाइड अकाउंट्स पर लगने वाली रोक जैसी समस्याओं से निपटने के लिए मेटा की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी।













































