फ्रांस में ‘योगी मॉडल’ की चर्चा, दंगाइयों से नुकसान की भरपाई कराने की तैयारी

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फ्रांस में हुई हिंसा के दौरान दुकानों, सार्वजनिक इमारतों और दूसरी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा। इसके बाद फ्रांस सरकार ने साफ किया कि दंगाइयों को सिर्फ आपराधिक सजा देना ही काफी नहीं, बल्कि नुकसान की भरपाई भी सुनिश्चित होनी चाहिए।France News: फ्रांस में हालिया हिंसा और तोड़फोड़ के बाद सरकार ने नुकसान की भरपाई कराने के लिए कानूनी प्रावधानों को और सख्त करने की पहल की है। और इसी के साथ एक बार फिर चर्चा हो रही है यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के उस मॉडल की, जिसमें दंगों और विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से मुआवजा वसूलने के लिए कानून बनाया गया था। साल 2020 में उत्तर प्रदेश में बना कानून अब फ्रांस की इस पहल के साथ जोड़ा जा रहा है। आखिर दोनों के बीच समानता क्या है? क्या फ्रांस भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश में हुई थी? और क्यों कानून-व्यवस्था के योगी मॉडल की चर्चा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही है?

फ्रांस में सार्वजनिक संपत्तियों को पहुंचाया नुकसान

फ्रांस में हुई हिंसा के दौरान दुकानों, सार्वजनिक इमारतों और दूसरी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा। इसके बाद फ्रांस सरकार ने साफ किया कि दंगाइयों को सिर्फ आपराधिक सजा देना ही काफी नहीं, बल्कि नुकसान की भरपाई भी सुनिश्चित होनी चाहिए। 16 सितंबर 2026 को फ्रांस सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर हिंसा और तोड़फोड़ से हुए नुकसान की भरपाई व मुआवजे की वसूली से संबंधित विधेयक पेश किया था। इस प्रस्ताव में सामूहिक हिंसा में शामिल लोगों की आर्थिक जवाबदेही तय करने और कुछ परिस्थितियों में उन्हें संयुक्त रूप से जिम्मेदार बनाने का प्रावधान शामिल है। यानी अब बहस सिर्फ दंगाइयों को गिरफ्तार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी है कि सार्वजनिक और निजी संपत्ति को हुए नुकसान का आर्थिक बोझ आखिर कौन उठाएगा।

क्लेम्स ट्रिब्यूनल की व्यवस्था की गई

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इसी सवाल से निपटने के लिए साल 2020 में उत्तर प्रदेश सार्वजनिक और निजी संपत्ति क्षति वसूली अधिनियम बनाया था। इस कानून का उद्देश्य बंद, हड़ताल, दंगा, सार्वजनिक उपद्रव और विरोध-प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से उसकी भरपाई कराना है। इसके लिए दावा अधिकरण यानी क्लेम्स ट्रिब्यूनल की व्यवस्था की गई। यह अधिकरण नुकसान का आकलन करता है और जिम्मेदारी निर्धारित होने पर मुआवजे का आदेश दे सकता है।

जवाबदेही तय करने की कानूनी व्यवस्था मौजूद

इस कानून के तहत सरकारी संपत्ति के साथ-साथ निजी संपत्ति के नुकसान की भरपाई का भी प्रावधान है। यानी किसी सरकारी बस, सार्वजनिक भवन, दुकान या किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया है, तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों की आर्थिक जवाबदेही तय करने की कानूनी व्यवस्था मौजूद है।

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