संविधान संशोधन पर सरकार की अग्निपरीक्षा, क्या संसद में जुटेगा दो-तिहाई बहुमत?

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नई दिल्ली: संसद के मॉनसून सत्र में केंद्र सरकार अगर महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक लाती है तो इस बार सरकार की स्थिति पहले से बेहतर हो सकती है। हालांकि, लोकसभा अब भी वह दो तिहाई बहुमत से दूर नजर आ रही है। मौजूदा गणित के हिसाब से लोकसभा में एनडीए और उसके समर्थकों की संख्या 324 मानी जा रही है। इसमें वे पांच सांसद भी शामिल हैं जिन्होंने अप्रैल में सरकार के पक्ष में मतदान किया था, भले ही वे औपचारिक रूप से एनडीए का हिस्सा नहीं हैं। इसी तरह राज्यसभा के अनुमानित आंकड़ों में भी 4 ऐसे सांसदों को सरकार के संभावित समर्थकों में शामिल किया गया है, जिन्होंने अप्रैल के मतदान में सरकार के पक्ष में रुख दिखाया था।

वॉक आउट की स्थिति में समस्या होगी

अगर लोकसभा के सभी 540 सांसद मतदान करते हैं तो संविधान संशोधन के लिए 360 वोट चाहिए। एनडीए और समर्थकों के पास फिलहाल 324 वोट हैं। डीएमके के 22 सांसदों का समर्थन मिलने पर संख्या 346 होगी, लेकिन तब भी सरकार जरूरी बहुमत से 14 वोट पीछे रहेगी। इसलिए केवल डीएमके का समर्थन उनके लिए पर्याप्त नहीं होगा।

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