Operation Sindoor: प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) ने हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट शेयर किए हैं, जिनमें उसने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान हुए हमलों और नुकसान का जिक्र किया है। इन पोस्टों में संगठन ने अपने मारे गए आतंकियों को ‘शहीद’ बताया और उस रात के माहौल को डर और अफरा-तफरी भरा बताया। एक पोस्ट में लिखा गया कि उस रात आसमान से आग बरसती हुई महसूस हो रही थी और हर तरफ जोरदार धमाकों की आवाजें सुनाई दे रही थीं। पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि धमाकों के बीच धार्मिक नारे लगाए जा रहे थे।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के कारण पाकिस्तान के बहावलपुर इलाके में भारी नुकसान
संगठन ने इसे पुराने दौर की लड़ाइयों जैसा माहौल बताया और धार्मिक भावनाओं से जोड़ने की कोशिश की। इसके अलावा संगठन के महिला विंग ‘अल-मोमिनात’ का भी जिक्र किया गया। एक अन्य पोस्ट में दावा किया गया कि पिछले कुछ दिनों में बड़ी संख्या में महिलाओं तक उनका संदेश पहुंचाया गया। पोस्ट के अनुसार, 2200 से ज्यादा महिलाओं ने संगठन के महिला विंग की सदस्यता ली। इसमें कहा गया कि उनके काम में खास बरकत मिली है और संगठन ने इसे अपनी बड़ी उपलब्धि बताया। सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी कहा गया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के बहावलपुर इलाके में संगठन के कई बड़े ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा।
इन सोशल मीडिया पोस्टों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
इनमें मस्जिद सुभान अल्लाह और अन्य तीन बड़े केंद्र शामिल बताए गए हैं। संगठन ने दावा किया कि उनके तीन बड़े केंद्र तबाह हुए, लेकिन बाद में फिर से सक्रिय हो गए। इन पोस्टों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। माना जा रहा है कि आतंकी संगठन सोशल मीडिया के जरिए अपने समर्थकों का मनोबल बढ़ाने और नए लोगों को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। खासतौर पर महिलाओं की भर्ती से जुड़ी बातें सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय मानी जा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के संदेशों का मकसद आतंकियों के नेटवर्क को मजबूत दिखाना और डर का माहौल बनाना होता है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां लगातार ऐसे संगठनों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।










































