‘कतिया करूं’ गाने का मतलब जानते हैं! 63 साल पुरानी फिल्म का लोक गीत, प्रेमी के इबादत की कहानी

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इम्तियाज अली एक ऐसे कहानीकार हैं जिन्हें हम जैसे सिनेमा प्रेमी जरूर देखना पसंद करते हैं। यह फिल्ममेकर कुछ ऐसी बेहतरीन फिल्में और शानदार गाने बनाने के लिए जाने जाते हैं जो आज भी हमारे दिलों में बसे हुए हैं। हाल ही में उनकी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ रिलीज हुई है और लोग इसकी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। फिल्म की कहानी हो या इसके गाने, सुनते ही आपकी आंखें भर आएंगी। इम्तियाज अली की फिल्मों के लिए ये कोई नई बात नहीं है। ऐसी ही एक कल्ट है ‘रॉकस्टार’। ये इम्तियाज की वो फिल्म है जिसने तारीफ पाने के साथ बॉक्स ऑफिस पर भी कमाल किया था। इस फिल्म का एल्बम भी शानदार है। हर गाने एक से बढ़कर कलाकारी से बनाए गए हैं। लेकिन ‘संडे सिनेमा’ में आज हम बात करेंगे फेमस ट्रैक ‘कतिया करूं’ की। इस गाने को गाते तो सब हैं, लेकिन आपमें से कितने लोगों को पता है कि ‘कतिया करूं’ का मतलब क्या होता है!

एआर रहमान के संगीत में हर्षदीप कौर का गाया यह गाना फिल्म के मुख्य कलाकार रणबीर कपूर और नरगिस फाकरी पर फिल्माया गया है, जिसमें वे अलग-अलग जगहों पर घूमते हुए नजर आते हैं। जानकारी के लिए बता दें कि ‘कतिया करूं’ एक पंजाबी लोक गीत है, जिसे पारंपरिक रूप से भारत के ग्रामीण इलाकों में महिलाएं चरखे पर सूत कातते हुए और अपने पतियों के घर लौटने का इंतजार करते हुए गाती थीं।


इरशाद कामिल के ‘कतिया करूं’ का मतलब

जब फिल्म के लिए इरशाद कामिल ने इस लोक-कथा को नए सिरे से लिखा, तो गीतकार ने इसे एक आध्यात्मिक गहराई दी। उनके अनुसार, ‘सारी रातें कतिया करूं’ लाइन का इस्तेमाल एक सूफी भाव के तौर पर किया गया था, जिसका मतलब है कि वह औरत पूरी रात अपने प्रेमी की इबादत (पूजा) करती है। इस गाने में चरखे का जिक्र सांस लेने की प्रक्रिया का प्रतीक है, जो सिर्फ मौत होने पर ही रुकती है।

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