बड़ा आंदोलन अभी नहीं, पहले जेल में बंद समाज के लोगों की कानूनी मदद और बेगुनाहों को मामले से बाहर कराने की कवायद,
समाज ने चेताया न्याय नहीं मिला तो आंदोलन अंतिम विकल्प
किरनापुर थाने में चौधरी दंपति के साथ हुई कथित मारपीट, सावित्री चौधरी के गर्भपात, पुलिस कार्रवाई और थाने में हुई तोड़फोड़ को लेकर मरार-माली समाज ने 25 सितंबर को बूढ़ी स्थित पानी टंकी के नीचे समाज भवन में प्रदेश स्तरीय बैठक कर अपने अगले कदम को लेकर स्थिति साफ कर दी। दोपहर 2 बजे आयोजित इस बैठक में बालाघाट मरार समाज के जिला अध्यक्ष रमेश पांचे, भाजपा जिला अध्यक्ष एवं समाज पदाधिकारी रामकिशोर कावरे, पूर्व विधायक हिना कावरे सहित जिले के विभिन्न पदाधिकारी और प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे समाज प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
बैठक में समाज के तेवर जरूर तल्ख रहे, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया गया कि अब किसी भी तरह का नेतृत्वहीन और कानून के दायरे से बाहर आंदोलन नहीं होगा। समाज पदाधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आगे जो भी कदम उठाया जाएगा, वह पूरी तरह विधि और कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा। कुछ वक्ताओं ने कहा कि समाज ने पहले भी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का प्रयास किया था, लेकिन आंदोलन को गलत दिशा देकर समाज के लोगों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया गया। इसी अनुभव के बाद अब समाज ने सीधे कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया है। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि फिलहाल जिले में किसी बड़े धरना, प्रदर्शन या आंदोलन की योजना नहीं है। पहले पूरे मामले में कानूनी स्थिति को समझा जाएगा और जिन समाज के लोगों पर प्रकरण दर्ज हैं तथा जो जेल में बंद हैं, उन्हें नियमानुसार कानूनी सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही ऐसे लोगों को मामले से बाहर कराने की कोशिश होगी, जिनका घटनाक्रम से कोई संबंध नहीं है। किरनापुर थाने में चौधरी दंपति के साथ कथित मारपीट और सावित्री चौधरी के गर्भपात को लेकर भी बैठक में जमकर सवाल उठे। वक्ताओं ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यदि शुरुआत से ही पूरे मामले में नियम और प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाती तो विवाद इतना आगे नहीं बढ़ता। उनका कहना था कि यदि समाज के किसी व्यक्ति ने गलती की थी तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए थी और यदि पुलिसकर्मियों की ओर से गलती हुई थी तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए थी। समाज ने किसी दोषी को बचाने के बजाय दोषी पर कार्रवाई और बेगुनाह को बचाने की बात कही। किरनापुर थाने में हुई तोड़फोड़ की घटना को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि घटना में जो वास्तव में दोषी हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए, लेकिन ऐसे लोगों को आरोपी बनाकर कार्रवाई का हिस्सा नहीं बनाया जाए, जिनकी घटना में कोई भूमिका नहीं है। समाज की ओर से इसी मुद्दे को आगामी कानूनी लड़ाई का प्रमुख आधार बनाए जाने के संकेत दिए गए। बैठक में पूर्व विधायक हिना कावरे ने भी समाज को संयमित और कानूनसम्मत तरीके से आगे बढ़ने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरार-माली समाज शांतिप्रिय और सभ्य समाज है तथा वह किसी भी प्रकार के अनावश्यक दबाव, गलत तरीके के प्रदर्शन या कानून व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गतिविधि के पक्ष में नहीं है। उन्होंने समाज पदाधिकारियों से कहा कि पूरी लड़ाई कानून और विधि के दायरे में रहकर ही लड़ी जानी चाहिए। भाजपा जिला अध्यक्ष एवं समाज पदाधिकारी रामकिशोर कावरे ने कहा कि पूरे मामले में फंसे लोगों को विधि के अनुसार बचाने और बेगुनाहों को प्रकरण से बाहर कराने की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने सावित्री चौधरी के साथ हुई घटना में भी दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की बात कही। कावरे ने कहा कि समाज के पदाधिकारियों की राय लेने के साथ विधिक सलाह के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। कुल मिलाकर 25 सितंबर की प्रदेश स्तरीय बैठक में मरार-माली समाज ने तत्काल सड़क पर उतरने के बजाय कानून के रास्ते लड़ाई लड़ने का फैसला किया है। समाज ने एक ओर संयम का संदेश दिया है तो दूसरी ओर यह भी साफ कर दिया है कि यदि उसे लगता है कि निर्दोष लोगों को फंसाया गया या न्यायसंगत कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन का विकल्प बंद नहीं हुआ है। अब समाज की आगामी रणनीति प्रदेश और जिला पदाधिकारियों की राय तथा कानूनी सलाह के बाद सामने आएगी।
फिलहाल कोई बड़े आंदोलन नहीं होंगा – रमेश पांचे
मरार समाज जिला अध्यक्ष रमेश पांचे ने बैठक के बाद कहा कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए समाज पदाधिकारियों से पूरे मामले पर राय ली जाएगी। सभी की राय और विधिक सलाह के आधार पर आगे की रणनीति तय होगी। उन्होंने कहा कि समाज की ओर से लिए जाने वाले निर्णयों की जानकारी जल्द ही मीडिया के सामने रखी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी बड़े आंदोलन या प्रदर्शन का निर्णय नहीं लिया गया है। रमेश पांचे ने कहा कि समाज की पहली प्राथमिकता जेल में बंद अपने लोगों को नियम के अनुसार कानूनी मदद दिलाना और उन लोगों को बचाना है, जो पूरे घटनाक्रम में शामिल नहीं हैं। यदि नियमानुसार कार्रवाई नहीं होती, निर्दोष लोगों को मामले से बाहर नहीं किया जाता और न्यायसंगत कार्रवाई नहीं होती, तो बड़ा आंदोलन समाज के पास अंतिम विकल्प के रूप में मौजूद रहेगा। हालांकि फिलहाल आंदोलन का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।






































