Kriti Sanon Angry On Patriarchy: बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस कृति सेनन ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर कुछ पोस्ट साझा की है, जिसमें उन्होंने पितृसत्ता पर तो करारी चोट की ही। साथ ही महिलाओं के खिलाफ अपराध पर भी भड़ास निकाली।Kriti Sanon Angry On Patriarchy: बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस कृति सेनन ने अपनी फिल्मों और अंदाज से लोगों का खूब दिल जीता है। कृति सेनन ने बॉलीवुड में रहते हुए कई हिट फिल्में दी हैं। लेकिन एक्टिंग से इतर कृति सेनन हाल ही में अपनी बेबाकी के लिए चर्चा में आ गई हैं। दरअसल, कृति सेनन ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर कुछ पोस्ट साझा कीं, जिनके जरिए उन्होंने न केवल महिलाओं के खिलाफ नफरत पर करारी चोट की, बल्कि मर्दों को सिखाने की भी बात रखी। इससे इतर कृति सेनन ने अपने विज्ञापन विवाद पर भी रिएक्शन दिया है। कृति सेनन की ये पोस्ट देखते ही देखते सुर्खियों में आ गई हैं। कृति सेनन (Kriti Sanon) ने इंस्टाग्राम स्टोरी में कुछ पोस्ट साझा कीं। पहली स्टोरी में लिखा नजर आया, “दोस्तों ये मर्द बनाम औरत नहीं है। ये औरत बनाम महिलाओं के खिलाफ नफरत से भरे मर्द और उन ब्रेनवॉश औरतों की बात है, जिन्हें लगता है कि पितृसत्ता ही संस्कार हैं।” कृति सेनन ने महिलाओं के खिलाफ यौन शोषण पर भी तंज कसा। उनकी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा नजर आया, “किस प्वॉइंट पर आकर हम औरतों को ये सिखाना बंद करेंगे कि शोषित होने से कैसे बचें और मर्दों को सिखाना शुरू करेंगे कि शोषण, धमकाना और महिलाओं पर नियंत्रण गलत है। एक नाबालिग का रेप होता है और ये पूछने की जगह कि किस तरह के इंसान ने बच्ची के साथ ये किया है? हम ये तलाशते हैं कि उस बच्ची ने पहना क्या था। वो थी कहां, किसके साथ थी, बाहर क्यों थी और उसके परिवार ने क्या अनुमति दी हुई है।कृति सेनन (Kriti Sanon) यहीं नहीं रुकीं। उनकी तीसरी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा नजर आया, “हमें अगला लेक्चर नहीं चाहिए कि महिलाओं को कैसे सुरक्षित रहना है। हमें मर्दों को सिखाना है कि कैसे उन्हें खुद पर काबू रखने के लिए नियंत्रित महिला की जरूरत नहीं है। लड़कों को सिखाओ, मर्दों को सिखाओ, उन्हें सहमति सिखाओ, सम्मान सिखाओ, विश्वसनीयता सिखाओ। और मर्दों की हर हरकत के लिए औरत को जिम्मेदार ठहराना बंद करो।”कृति सेनन ने विज्ञापन विवाद से जुड़ी पोस्ट लाइक की। इस पोस्ट में लिखा था, “तथ्य ये है कि रेप, यौन शोषण, घरेलू हिंसा और दहेज प्रथा देश में इतना आक्रोश नहीं बढ़ाता, जितना एक फेस्टिव विज्ञापन में महिला के पहनावे से बढ़ता है। ये हमारी प्राथमिकता बताता है।”










































