कौन है शेयर बाजार का ‘Alpha’ क्यों हमेशा ‘अल्फा जनरेट’ करने के पीछे भागते हैं बड़े इन्वेस्टर्स?

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Alpha in The Stock Markets : शेयर बाजार में अक्सर सुनने को मिलता है कि किसी फंड मैनेजर ने “अल्फा जनरेट किया” या कोई म्यूचुअल फंड हाई अल्फा दे रहा है। लेकिन आखिर यह अल्फा है क्या? क्या यह किसी शेयर का नाम है या कोई खास फॉर्मूला? दरअसल, अल्फा एक ऐसा पैमाना है जिससे पता चलता है कि किसी निवेश ने बाजार से बेहतर प्रदर्शन किया या नहीं। अगर आपने सिर्फ बाजार जितना रिटर्न कमाया है तो आपने बाजार का साथ दिया। लेकिन अगर आपने बाजार से ज्यादा कमाई की है, तो वही आपका अल्फा है।

आखिर क्या होता है Alpha?

अल्फा (Alpha) को ग्रीक अक्षर α से दिखाया जाता है। यह बताता है कि किसी शेयर, म्यूचुअल फंड या पूरे पोर्टफोलियो ने अपने बेंचमार्क इंडेक्स (जैसे निफ्टी 50 या सेंसेक्स) की तुलना में कितना बेहतर या खराब प्रदर्शन किया। सरल शब्दों में कहें तो बाजार से मिलने वाले सामान्य रिटर्न से ऊपर जो अतिरिक्त रिटर्न मिलता है, वही अल्फा कहलाता है। मान लीजिए आपने किसी इक्विटी फंड में निवेश किया। उसी अवधि में निफ्टी ने 8% रिटर्न दिया। लेकिन, आपके फंड ने 10% रिटर्न दिया। ऐसे में आपका अल्फा 2% होगा। यानी आपके फंड मैनेजर ने बाजार से 2% ज्यादा कमाई कराई।

पॉजिटिव, नेगेटिव और जीरो Alpha का क्या मतलब?

अब अगर निफ्टी 8% बढ़ा और आपका फंड सिर्फ 6% बढ़ा, तो आपका अल्फा -2% (माइनस 2%) होगा। इसका मतलब है कि आपका निवेश बाजार से पीछे रह गया। पॉजिटिव अल्फा का मतलब है कि निवेश ने बाजार से बेहतर प्रदर्शन किया। वहीं, नेगेटिव अल्फा बताता है कि बाजार की तुलना में कम रिटर्न मिला। जबकि,किसी इंडेक्स फंड का रिटर्न लगभग इंडेक्स के बराबर है, तो उसका अल्फा शून्य (0) माना जाता है।

बड़े निवेशक हमेशा Alpha के पीछे क्यों भागते हैं?

दुनिया के बड़े फंड हाउस, हेज फंड और पोर्टफोलियो मैनेजर का लक्ष्य सिर्फ पैसा कमाना नहीं होता। उनका असली लक्ष्य होता है बाजार से बेहतर रिटर्न देना। अगर कोई फंड लगातार पॉजिटिव अल्फा बनाता है, निवेशकों का उसके ऊपर भरोसा बढ़ता है। फंड में ज्यादा निवेश आता है। फंड मैनेजर की साख मजबूत होती है। इसके साथ ही लंबी अवधि में निवेशकों की संपत्ति तेजी से बढ़ सकती है। इसी वजह से “अल्फा जनरेट करना” प्रोफेशनल निवेश की दुनिया में सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है।

क्या सिर्फ ज्यादा रिटर्न ही Alpha है?

मान लीजिए किसी फंड ने बहुत ज्यादा जोखिम लेकर बाजार से ज्यादा कमाई की। ऐसे में सिर्फ रिटर्न देखकर उसे बेहतर नहीं कहा जा सकता। इसलिए प्रोफेशनल निवेशक जोखिम को भी साथ में देखते हैं। इसी कारण कैपिटल एसेट प्राइसिंग मॉडल (सीएपीएम) जैसे मॉडल का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें जोखिम, बाजार का रिटर्न और बिना जोखिम वाले निवेश (जैसे फिक्स्ड डिपॉजिट या सरकारी बॉन्ड) के रिटर्न को भी ध्यान में रखा जाता है।

जेनसेन Alpha क्या होता है?

जब अल्फा निकालते समय निवेश के जोखिम (रिस्क) को भी शामिल किया जाता है, तो उसे जेनसन अल्फा (Jensen’s Alpha) कहा जाता है। इसमें सिर्फ अतिरिक्त रिटर्न नहीं देखा जाता, बल्कि यह भी देखा जाता है कि उस अतिरिक्त रिटर्न के लिए कितना जोखिम उठाया गया। यही वजह है कि बड़े निवेशक और प्रोफेशनल फंड मैनेजर अक्सर जेनसन अल्फा को ज्यादा महत्व देते हैं। अल्फा हमेशा भविष्य की गारंटी नहीं देता। कोई फंड आज अच्छा अल्फा बना रहा है, इसका मतलब यह नहीं कि वह अगले साल भी वैसा ही प्रदर्शन करेगा।

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