तिरोड़ी पुलिस की पीडि़त ने कलेक्टर से की शिकायत, निष्पक्ष जांच की मांग

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पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। तिरोड़ी थाना क्षेत्र के ग्राम गुडरूघाट निवासी पीडि़त शरद रामटेके ने स्थानीय पुलिस प्रशासन और कुछ ग्रामीण पर प्रताडऩा, मारपीट एवं जातिसूचक गालियां देने का आरोप लगाया है। पीडित ने जिला कलेक्टर जनसुनवाई के समक्ष गुहार लगाकर न्याय और दोषियों पर सख्त कार्यवाही की मांग की है। पीडि़त ने शिकायत में बताया की घटना २२ अगस्त २०२६ की रात लगभग ८ बजे की है। गांव में अन्य युवकों के बीच विवाद और पत्थरबाजी हो रही थी जिससे गुजरते समय एक पत्थर पीडित के अंगूठे पर लगा और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। जब शरद रामटेके ने विवाद कर रहे लोगों से इसकी शिकायत की तो उन्होंने उल्टे उसके साथ गाली.गलौज और विवाद शुरू कर दिया। इसके बाद मौके पर पहुंची डायल ११२ पुलिस पीडि़त को ही पकडक़र तिरोड़ी थाने ले गई। शिकायत पत्र में आरोप लगाया है कि थाने में पदस्थ एएसआई उमेश दियेवार के द्वारा पीडित को घसीटकर सीसीटीवी कैमरों से दूर एक कमरे में ले जाया गया जहां उसके साथ मारपीट की गई। अगली सुबह २३ अगस्त को मुंशी रामसिंग धुर्वे के द्वारा भी जातिगत शब्द कहते हुए अमर्यादित प्रताडऩा दी। बाद में पीडित पर धारा १५१ के तहत कार्यवाही कर कटंगी एसडीएम न्यायालय पेश किया गया जहां से उसे जमानत मिली। वह परिवार का अकेला कमाने वाला सदस्य है और उसके पिता लकवाग्रस्त हैं। पुलिस की कथित साठगांठ और बर्बरता से उसका परिवार मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताडि़त हुआ है। पीडित ने कलेक्टर बालाघाट से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषी पुलिसकर्मियों व दबंगों पर दंडात्मक कार्यवाही की जाए और उसके विरुद्ध दर्ज झूठे प्रकरण को समाप्त किया जाए। शरद रामटेक ने बताया कि मैं अपने घर से चौक पर चाउमीन खरीदने गया था वहां पर निखिल शेंडे एवं पवन राहगंडाले,श्याम राहगंडाले का विवाद हो रहा था। जहां पत्थर बाजी का पत्थर मुझे लगा तो मैं उन्हें टोकने गया जहां उनके द्वारा मुझसे मारपीट की गई। मैंने १८१ को सूचना दी और फिर थाने जाने की तैयारी कर रहा था तभी पवन के द्वारा ११२ बुलाई गई थी। जिसने मुझे जबरदस्ती गाड़ी में डालकर थाने में लाई जहां पर पुलिस अधिकारी के द्वारा मुझे घसीटा गया थाने में मुझे अपमानित कर मारपीट की गई। अभी मैं जमानत पर हूं इसकी शिकायत मैंने पहले पुलिस अधीक्षक को किया था। कार्यवाही नही होने पर मानवाधिकार मैं शिकायत करने के बाद पुन: जिला कलेक्टर को जन्म सुनवाई में आवेदन दिया है।

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