‘परमाणु ताकत से लैस भारत को जापान से सीखने की जरूरत’, एक्सपर्ट ने भारत को बताया चीन से निपटने का प्लान

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नई दिल्ली: मशहूर जिओ पॉलिटिकल एक्सपर्ट ब्रह्मा चेलानी ने दावा किया है कि चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति और एशिया में उसके विस्तारवादी प्रभाव के मुकाबले जापान ने अपनी रक्षा निर्णय और प्रक्रिया को भारत की तुलना में कहीं अधिक प्रभावशाली और आधुनिक बनाया है।

ब्रह्मा चेलानी के अनुसार, संविधान से शांतिवादी जापान ने पिछले एक दशक में अपनी रक्षा व्यवस्था में जबरदस्त सुधार किए हैं। वहीं, परमाणु शक्ति संपन्न भारत अभी भी ऐसी नौकरशाही व्यवस्था पर निर्भर है, जिसमें सैन्य विशेषज्ञों की भूमिका सीमित बनी हुई है और निर्णय लेने की प्रक्रिया मुख्य रूप से सामान्य प्रशासनिक अधिकारियों के हाथों में केंद्रित है। उन्होंने बताया कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान ने सैन्यवाद की वापसी रोकने के लिए रक्षा मंत्रालय में नौकरशाहों को प्रमुख भूमिका दी थी। वहीं दूसरी ओर भारत ने आजादी के बाद सैन्य तख्तापलट की आशंकाओं को देखते हुए सेना की संस्थागत भूमिका को काफी हद तक सीमित रखा और रक्षा मंत्रालय में मुख्य तौर पर आईएएस अधिकारियों का नियंत्रण रखा।जापान ने 2015 में किए थे बड़े रक्षा सुधार

जापान की चीन और उत्तर कोरिया से बढ़ते खतरे को देखते हुए साल 2015 में बड़े रक्षा सुधार लागू किए। इन सुधारों के तहत रक्षा मंत्रालय में नौकरशाहों और सैन्य अधिकारियों को समान दर्जा दिया गया, सैन्य नेतृत्व को अधिक प्रभार अधिकार मिले और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) के माध्यम से रक्षा, खुफिया और राजनीतिक निर्णयों का बेहतर समन्वय स्थापित किया गया।

रक्षा सुधार में भारती स्पीड धीमी

ब्रह्मा चेलानी ने कहा, ‘वहीं दूसरी ओर परमाणु ताकत से संपन्न भारत में सुधारों की स्पीड काफी धीमी रही है। साल 2019 में सीडीएस का पद बनाया गया था, जिसका उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाना और थिएटर कमांड स्थापित करना था। लेकिन जनरल बिपिन रावत की 2021 में एक हेलीकॉप्टर हादसे में मौत के बाद सरकार ने सीडीएस पद के लिए पात्रता नियमों में बडे़ बदलाव कर दिए और रिटायर्ड अधिकारियों के लिए सीडीएस अधिकारी बनने का रास्ता खोल दिया।’

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