Vande Mataram Row: ‘यह ऐतिहासिक भूल है, आप लोगों ने बहुत बड़ी गलती की’, बंकिम चंद्र के वंशज ने सोनिया गांधी को लिखी चिट्ठी

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Vande Mataram Row: ‘वंदे मातरम्’ विवाद अब और गहराता जा रहा है। पश्चिम बंगाल के बीजेपी विधायक और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के प्रत्यक्ष वंशज सुमित्रो चटर्जी ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत के कथित अपमान पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने सोनिया गांधी से देशवासियों, खासकर पश्चिम बंगाल के लोगों से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की।Vande Mataram Row: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम्’ के कथित अपमान को लेकर सियासी विवाद और गहरा गया है। पश्चिम बंगाल के बीजेपी विधायक और ‘वंदे मातरम्’ के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के प्रत्यक्ष वंशज सुमित्रो चटर्जी ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर घटना पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने कथित घटना के लिए देशवासियों, खासकर पश्चिम बंगाल के लोगों से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है।

सोनिया गांधी को लिखे पत्र में क्या कहा?

नैहाटी विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक सुमित्रो चटर्जी ने अपने पत्र में कहा कि देश जब 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मातृभूमि के सम्मान में समर्पित था, उसी समय कांग्रेस मुख्यालय में हुआ घटनाक्रम बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसे इतिहास की एक गंभीर गलती की पुनरावृत्ति करार दिया।चटर्जी ने दावा किया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण संस्करण का गायन किए जाने के दौरान सोनिया गांधी की कथित असहजता और उसे रोकने की कोशिशों से उन्हें गहरा दुख पहुंचा। उन्होंने लिखा कि एक आम भारतीय नागरिक, देशभक्त और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के परिवार का प्रत्यक्ष वंशज होने के नाते वह यह पत्र गहरे दर्द और व्यथा के साथ लिख रहे हैं।

‘वंदे मातरम्’ को बताया स्वतंत्रता आंदोलन का मंत्रबीजेपी विधायक ने अपने पत्र में ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक महत्व का भी जिक्र किया। उन्होंने श्री अरविंद के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि इस गीत ने देश में देशभक्ति की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने दावा किया कि ‘वंदे मातरम्’ ने खुदीराम बोस समेत कई क्रांतिकारियों को देश की आजादी के लिए बलिदान देने की प्रेरणा दी। चटर्जी ने कहा कि आजाद भारत में इसी गीत के पूर्ण गायन के प्रति कथित असहिष्णुता लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का अपमान प्रतीत होती है।

बंगाल विभाजन और स्वदेशी आंदोलन का भी किया जिक्रचटर्जी ने अपने पत्र में बंगाल विभाजन के बाद स्वतंत्रता आंदोलन में ‘वंदे मातरम्’ की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने राष्ट्रवादी नेता बिपिन चंद्र पाल के लेखन का हवाला देते हुए कहा कि उस दौर में यह गीत क्रांतिकारियों की जुबान पर रहता था। उन्होंने ‘स्वदेशी’, ‘बहिष्कार’ और ‘वंदे मातरम्’ को स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख प्रतीकों के तौर पर पेश किया। इसके साथ ही उन्होंने 1905 के बनारस कांग्रेस अधिवेशन में सरला देवी चौधरानी द्वारा गीत के पूर्ण संस्करण के गायन और 1909 में बाल गंगाधर तिलक के राजद्रोह मुकदमे के दौरान समर्थकों द्वारा ‘वंदे मातरम्’ के नारे लगाए जाने का भी उल्लेख किया।

रवींद्रनाथ टैगोर से भी जोड़ा इतिहास

बीजेपी विधायक ने ‘वंदे मातरम्’ के इतिहास को रवींद्रनाथ टैगोर से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि टैगोर ने 1896 में कलकत्ता में हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया था।

चटर्जी ने टैगोर के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि इस गीत के शब्दों में ऐसी शक्ति थी, जो लोगों के बीच की बाधाओं को तोड़कर उनके दिलों को जोड़ सकती थी।

कांग्रेस पहले ही आरोपों को कर चुकी है खारिज

इस पूरे विवाद पर कांग्रेस पहले ही बीजेपी के आरोपों को खारिज कर चुकी है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश का कहना है कि पार्टी मुख्यालय में ‘वंदे मातरम्’ का अपमान नहीं हुआ और गीत का गायन बीच में नहीं रोका गया। कांग्रेस के मुताबिक, कार्यक्रम में हुई घटना को बीजेपी ने गलत तरीके से पेश किया है। वहीं, बीजेपी लगातार कांग्रेस नेताओं से इस मामले में सफाई और माफी की मांग कर रही है।

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