Firing in Rawalpindi: पाकिस्तान के रावलपिंडी में पाकिस्तानी फौज की एक गश्ती टीम पर अचानक एक अज्ञात बंदूकधारी ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में एक पाकिस्तानी फौजी घायल हो गया। रावलपिंडी पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की है। गौरतलब है कि रावलपिंडी में पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय है। चकलाला स्थित मुख्यालय से घटना स्थल महज पांच किलोमीटर की दूरी पर है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद भी कुछ 15 किलोमीटर दूर है। इस जगह पर हमले के बाद पाकिस्तान सेना के हाथ-पैर फूल गए हैं।
इलाके में मची अफरातफरी
रावलपिंडी पुलिस के प्रवक्ता की तरफ से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह वारदात सुबह लगभग 11:15 बजे घटी. मॉल रोड में हमलावर ने पाकिस्तानी गश्ती दल पर गोलियां चला दीं। फायरिंग की आवाज सुनते ही आसपास के इलाके में भगदड़ मच गई. पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि हमलावर की पहचान मोहम्मद हुसैन के तौर पर हुई है। पाक फौजी को गोली लगने के बाद हमलावर भी जवाबी कार्रवाई में मारा गया।
पीटीआई ने बंदूकधारी की हत्या की निंदा की
जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी के खैबर पख्तूनख्वा के एक वरिष्ठ नेता ने मंगलवार को रावलपिंडी में सेना के जनरल हेडक्वार्टर के पास एक चेक पोस्ट पर कथित तौर पर गोलीबारी करने वाले बंदूकधारी की हत्या की निंदा की। इससे पहले दिन में बंदूकधारी ने सुरक्षा अधिकारियों पर गोलीबारी की, जिसके जवाब में सुरक्षा अधिकारियों ने भी गोलीबारी की। पुलिस ने दावा किया कि हमलावर खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी से जुड़ा था।रावलपिंडी पुलिस के एक बयान में कहा गया, “जवाबी गोलीबारी में हमलावर मोहम्मद हुसैन तुरंत मारा गया।” खैबर पख्तूनख्वा के सूचना मंत्री शफीउल्लाह जान ने कहा कि मृतक मोहम्मद हुसैन कथित तौर पर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित था और उन्होंने इस घटना को बेहद निंदनीय बताया। रावलपिंडी पुलिस ने कहा कि मृतक के मोबाइल फोन से मिले सबूतों से पता चलता है कि वह एक राजनीतिक दल से जुड़ा था। उन्होंने बताया कि उसके मोबाइल फोन और अन्य सामान से संबंध स्थापित हुए हैं। सुरक्षा सूत्रों का हवाला देते हुए सरकारी समाचार एजेंसी पीटीवी न्यूज ने बताया कि हमलावर खैबर जिले का निवासी और पीटीआई का सक्रिय सदस्य था। पीटीआई का झंडा, गोलियां और हथियार भी बरामद किए गए हैं।
राजनीतिक दल से जुड़े तार, मोबाइल से मिले अहम सुराग
रावलपिंडी पुलिस के बयान में बताया गया कि मोहम्मद हुसैन एक खास राजनीतिक दल से संबंध रखता था। घटनास्थल से हमलावर का शव कब्जे में लेने के बाद जब उसकी तलाशी ली गई, तो उसके पास से उसका मोबाइल फोन और कई अन्य सामान बरामद हुए हैं।
पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि मोबाइल और अन्य सामानों की शुरुआती जांच से इस बात के पुख्ता सबूत और दस्तावेज मिले हैं कि वह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था। कानून प्रवर्तन एजेंसियां (LEAs) अब उसके फोन कॉल डिटेल्स और डिजिटल सबूतों को खंगाल रही हैं ताकि इस साजिश के पीछे छिपे पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया जा सके। पाकिस्तान में इस तरह के हमलों का सिलसिला नया नहीं है, बलूचिस्तान से लेकर पीओके तक लोगों में भारी असंतोष है और इसी का परिणाम है कि विद्रोही इस तरह के हमले को अंजाम देते हैं।










































