दिल्ली: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह जनरेशन जेड के प्रतीक माने जाते हैं। उनका आम जनता के बीच जाना अनिल कपूर की फिल्म ‘नायक’ जैसा लगता है। हाथ हिलाने के दौरान चौकोर चश्मा पहने बालेन शाह किसी हीरो से कम नहीं लगते हैं। यही वजह है कि नेपाल के लाखों युवाओं के दिलों पर राज करते हैं। मगर, इस हीरो की एक बात भारत के लिए भी चिंता की बात हो सकती है। वह है उसका ग्रेटर नेपाल का सपना, जिसमें भारत के भी कुछ हिस्सों को दिखाया गया है। बालेन शाह ने फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भारत आने का न्यौता स्वीकार कर लिया। मगर, वह इन दिनों अपने एक फैसले से भी विरोध का सामना कर रहे हैं। वह है 100 रुपये से ज्यादा के भारतीय सामान लेने पर टैक्स की वसूली करना। इसे लेकर बालेन शाह के खिलाफ प्रदर्शन भी हो रहे हैं। मंडे मोटिवेशन में जानते हैं बालेन शाह की दिलचस्प कहानी।
नेपाल में न चाहिए कम्युनिस्ट न कांग्रेस
नेपाल में 35 साल के बालेन शाह तब आए, जब जनता केपी शर्मा ओली की सरकार से उकता चुकी थी। नेपाली जनता को नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी में भी कोई दिलचस्पी नहीं रह गई थी। बार-बार सत्ता के बदलाव के दौरान जनता नेपाली कांग्रेस और वामपंथी दलों की सरकार से ऊब गई थी। ऐसे में बालेन युवाओं के लिए एक नए पथ प्रदर्शक के रूप में उभरे। उन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) बनाई।
बालेन चीन, अमेरिका, भारत के खिलाफ मुखर रहे
- राजनीति में आने से पहले बालेन शाह रैपर रहे हैं। वह बेहद मुखर रहे हैं। वह चुनावों के दौरान चीन, अमेरिका और भारत के खिलाफ बोलने से नहीं हिचकिचाए। नेपाल में सत्ता के प्रतीकों को जलाने की धमकी देने के बाद उनकी आलोचना और उच्च पद के लिए उनकी योग्यता पर सवाल उठने लगे।
- उस वक्त बालेन ने काठमांडू के महापौर का चुनाव जीतकर आलोचकों को गलत साबित कर दिया। पर्यवेक्षकों और विश्लेषकों का कहना है कि कई नेपालियों के लिए, वह एक ऐसे देश में ताजी हवा के झोंके की तरह हैं, जहां 40 प्रतिशत से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है। वहीं, सभी प्रमुख दलों के नेता 70 वर्ष से अधिक उम्र के हैं।










































