शहर के वार्ड क्रमांक 12 बूढ़ी क्षेत्र में शराब दुकान को हटाने की मांग को लेकर चल रहा महिलाओं का आंदोलन अब एक अनोखे रूप में सामने आ रहा है। जहां आमतौर पर विरोध प्रदर्शन में नारेबाजी और आक्रोश देखने को मिलता है, वहीं यहां की महिलाएं शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी तरीके से अपनी बात रख रही हैं। महिलाएं शराब दुकान पर आने वाले ग्राहकों का विरोध करने के बजाय उन्हें फूलों की माला पहनाकर और गुलाब भेंट कर अपनी नाराजगी जाहिर कर रही हैं। इस प्रतीकात्मक विरोध के जरिए वे यह संदेश देने की कोशिश कर रही हैं कि शराब के कारण क्षेत्र का माहौल खराब हो रहा है और इसे रिहायशी इलाके से हटाया जाना चाहिए। इस अनोखे प्रदर्शन के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे हैं, जो तेजी से वायरल हो रहे हैं। शहर में इस तरीके की चर्चा जोरों पर है और लोग इसे एक अलग और सभ्य विरोध के रूप में देख रहे हैं। वहीं इस आंदोलन को अब जनप्रतिनिधियों का समर्थन भी मिलने लगा है। बीती रात रेखा बिसेन ने प्रदर्शन स्थल पहुंचकर महिलाओं का हौसला बढ़ाया और उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग उठाई। जनप्रतिनिधियों के समर्थन के बाद महिलाओं का आत्मविश्वास और बढ़ गया है। वे लगातार संगठित होकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रही हैं और साफ तौर पर कह रही हैं कि जब तक शराब दुकान का स्थान परिवर्तन नहीं किया जाएगा, उनका आंदोलन इसी तरह जारी रहेगा।
शहर के वार्ड क्रमांक 12 स्थित बूढ़ी क्षेत्र की शराब दुकान को अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने की मांग को लेकर महिलाओं का आंदोलन अब नए और अनोखे रूप में सामने आया है। बीते करीब 20 दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रहीं महिलाओं ने अब विरोध का शांतिपूर्ण और प्रतीकात्मक तरीका अपनाते हुए लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। 30 अप्रैल को सुबह से ही महिलाओं ने शराब दुकान के सामने साफ-सफाई अभियान चलाया। उन्होंने सड़क और नालियों की सफाई की और उसके बाद धरना स्थल पर बैठकर अपना प्रदर्शन जारी रखा। इस दौरान जब भी कोई व्यक्ति शराब खरीदने दुकान पर पहुंचा, तो महिलाओं ने विरोध जताने के बजाय उसे फूल-मालाओं से स्वागत किया और गुलाब का फूल भेंट किया। महिलाओं का कहना है कि उन्होंने पहले कई तरीकों से प्रदर्शन किया, लेकिन कई बार विवाद और झड़प की स्थिति भी बनी। ऐसे में अब उन्होंने शांति का रास्ता अपनाया है, ताकि बिना किसी टकराव के अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाई जा सके। उनका कहना है कि यह विरोध का तरीका समाज को संदेश देने के लिए अपनाया गया है कि वे किसी से लड़ना नहीं चाहतीं, बल्कि अपने क्षेत्र में शांति और सुरक्षित माहौल चाहती हैं। इस अनोखे प्रदर्शन का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं और लोग इस पहल की चर्चा कर रहे हैं। इधर, 29 अप्रैल की रात को चल रहे प्रदर्शन के दौरान पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रेखा बिसेन भी धरना स्थल पर पहुंचीं और महिलाओं के साथ बैठकर उनका समर्थन किया। उन्होंने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि रिहायशी क्षेत्र में शराब दुकान का संचालन उचित नहीं है और इसे तत्काल अन्यत्र स्थानांतरित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाएं लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रही हैं, ऐसे में प्रशासन को उनकी बात गंभीरता से सुननी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ अभद्रता और विवाद की घटनाएं हो रही हैं, जो बेहद चिंताजनक है। रेखा बिसेन ने इस मामले को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों और एसडीएम से चर्चा कर प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि महिलाएं शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रही हैं तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने रात के समय पर्याप्त रोशनी और पुलिस बल तैनात करने की भी मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि जब महिलाएं पिछले कई महीनों से आवेदन देकर शराब दुकान हटाने की मांग कर रही हैं, तो प्रशासन को इस पर शीघ्र निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने महिलाओं के आंदोलन को उचित ठहराते हुए कहा कि वे इस संघर्ष में उनके साथ हैं। वहीं प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने आरोप लगाया कि जहां एक ओर वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जता रही हैं, वहीं शराब दुकान संचालक ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नई-नई रणनीति अपना रहे हैं। उनका कहना है कि दुकान पर ही ग्राहकों को पानी और डिस्पोजल उपलब्ध कराकर वहीं शराब पिलाई जा रही है, ताकि ग्राहक बाहर न आएं और महिलाओं के विरोध का असर कम हो। महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि ग्राहकों को लुभाने के लिए शराब के दामों में भारी कमी की जा रही है, जिससे अधिक से अधिक लोग दुकान की ओर आकर्षित हो सकें। महिलाओं ने संबंधित विभाग और प्रशासन से इस पूरे मामले में तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक शराब दुकान को यहां से हटाया नहीं जाता, उनका आंदोलन इसी तरह जारी रहेगा।









































