शीतला माता मंदिर में ४११ मनोकामना ज्योति कलश हुए प्रज्वलित

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भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा शारदेय नवरात्र पर्व

पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। वारासिवनी की ग्राम देवी के नाम से मशहूर शीतला माता मंदिर में शारदेय नवरात्र पर्व ११ अक्टूबर से धार्मिक भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। इस दौरान ११ अक्टूबर की रात्रि ८ बजे विधि विधान से वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ शारदेय नवरात्र पर्व का प्रारंभ माता शीतला की पूजा अर्चना से किया गया। जिसके बाद ४११ मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए तत्पश्चात माता शीतला की महाआरती की गई। जहां पर रोजाना सुबह और शाम ८.३० बजे माता शीतला की विधि विधान से पूजा अर्चना कर आरती की जा रही है। वहीं रोजाना जस भजन कीर्तन जैसे कार्यक्रम कर शारदेय नवरात्र पर्व पूर्ण भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। जहां प्रतिदिन आरती के बाद भंडारे का वितरण कर रहे है,नवरात्रि की नवमी को कन्या भोज हवन पूजन भंडारा कर दशहरे के दिन ढोल नगाड़ों की थाप पर जवारे का विसर्जन किया जाएगा।

रोजाना भक्तों का लग रहा ताता

शीतला माता मंदिर नगर में एक अपना मुख्य स्थान रखता है माता शीतला नगर की ग्राम देवी है जिसके आशीर्वाद के साथ ही नगर का प्रत्येक व्यक्ति अपने शुभ कार्यों की शुरुआत करता है। चाहे वह वैवाहिक हो या सामाजिक माता शीतला के आशीर्वाद से ही हर कार्य पूर्ण होते हैं ,ऐसे में शारदेय नवरात्र पर्व प्रारंभ होने के साथ ही माता शीतला को जल चढ़ाने के लिए भक्तों की भीड़ अब मंदिरों में उमडऩे लगी है। सुबह ४.३० बजे से यह प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है जो दोपहर तक चलती है इस दौरान सुबह ७ बजे से ११ बजे तक भक्तों की बहुत भीड़ रहती है। ऐसे में दो से तीन भक्तों को प्रवेश देकर पूजा अर्चना संपन्न कराई जाती है।

दूर दूर से आकर रखे गये हैं मनोकामना कलश

शीतला माता मंदिर में भक्तों की गहरी आस्था और नगर वासियों की गहरी श्रद्धा होने का ही कारण है कि दूर दूर से लोग यहां पर मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वालित करवाते हैं। यह वही लोग है जो वारासिवनी अपनी जन्मभूमि को तो छोड़ चुके हैं परंतु माता शीतला को आज भी नहीं भूले हैं शारदेय हो या चैत्र नवरात्र वह माता रानी के दरबार में एक बार हाजिरी लगाकर ज्योति कलश जरूर स्थापित करवाते हैं। ऐसे में वारासिवनी ,बालाघाट के साथ ही रायपुर ,बिलासपुर, जयपुर ,बेंगलुरु और अमेरिका जा चुके लोग भी शीतला माता मंदिर में अपनी मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित करवाते हैं। इस वर्ष कुल ४११ मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए हैं।

वारासिवनी से भी पुराना है ग्राम देवी का मंदिर-योगेंद्र मात्रे

मंदिर सदस्य योगेंद्र मात्रे ने बताया की नगर की ग्राम देवी शीतला माता का मंदिर करीब ५०० वर्षों से भी ज्यादा पुराना होने की बात कही जाती है। साथ ही बताया जाता है कि जब यह वारासिवनी नगर कस्बे के रूप में स्थापित था उसके पहले से माता शीतला माता का मंदिर अपने स्थान पर स्थापित है। यह उस समय से ग्राम देवी है वर्तमान में जो मंदिर का स्वरूप नजर आता है वह बाद में बनाया गया है पहले माता माई के रूप में छोटे स्तर पर मंदिर बना हुआ था। बाद में नगर विस्तार के साथ साथ मंदिर का भी विस्तार होता गया जिससे वह वर्तमान स्वरूप में है। प्रतिदिन मंदिर में जस भजन का आयोजन किया जा रहा है रात्रि में प्रतिदिन आरती के बाद भंडारे का आयो

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