सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। ऐसे में इस दौरान उनसे संबंधित कुछ चीजों को घर लाना बेहद शुभ फलदायक माना जाता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार, भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने के लिए सावन में त्रिशूल और डमरू घर लाना उत्तम होता है। हालांकि, पूर्ण लाभ के लिए इन्हें सही स्थान और सही दिशा में रखना आवश्यक माना गया है। नियमानुसार त्रिशूल व डमरू घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है, वास्तु दोष का नाश होता है और सुख-समृद्धि के संयोग बनते हैं। ऐसे में आइए वास्तु गुरु मान्या से जानते हैं घर में त्रिशूल और डमरू रखने की दिशा, स्थान, नियम और लाभ विस्तार से।
अगर आप सावन के पावन माह में शिवजी का डमरू और त्रिशूल घर लाने की सोच रहे हैं, तो सही दिशा का ख्याल जरूर रखें। वास्तु गुरु मान्या बताती हैं कि त्रिशूल और डमरू को उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में रखना चाहिए। इस दिशा में को ज्योतिष और वास्तुशास्त्र में बेहद उत्तम व पवित्र माना गया है। यदि ऐसा संभव न हो तो आप पूर्व दिशा में भी डमरू और त्रिशूल रख सकते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।













































