हरियाली अमावस्या का हिंदू धर्म में खास महत्व बताया गया है। श्रावण मास की अमावस्या तिथि को हरियाली अमावस्या कहा जाता है जो सावन शिवरात्रि के अगले दिन पड़ती है। यह दिन पितरों की पूजा और नवग्रह शांति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने के बाद दान-पुण्य आदि कार्य करने से पाप कटित होते हैं और पितरों के आशीर्वाद से जीवन में सुख-समृद्धि के संयोग बनते हैं। वहीं, इस बार हरियाली अमावस्या पर उत्तम संयोग बन रहे हैं। ऐसे में व्रतियों और पितृकर्म करने वालों के लिए यह तिथि विशेष रूप से फलदायी रहेगा। तो आइए पं. राकेश झा से विस्तार से जानें हरियाली अमावस्या की डेट, शुभ मुहूर्त, महत्व और इस दिन कौन-कौन से संयोग बनेंगे।
हरियाली अमावस्या कब है ?
पंचांग के अनुसार, सावन मास की अमावस्या तिथि का आरंभ 11 अगस्त, मंगलवार के दिन रात में 1 बजकर 54 मिनट से होगा। वहीं, अगले दिन यानी 12 अगस्त, बुधवार को रात में 11 बजकर 7 मिनट तक अमावस्या तिथि व्याप्त रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, 12 अगस्त के दिन हरियाली अमावस्या का व्रत व पितृकर्म करना शास्त्र सम्मत होगा। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने के बाद दोपहर के समय पितरों की पूजा आदि कार्य किए जाते हैं।













































