पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। केंद्र और राज्य शासन की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना आवास प्लस सूची २०१८ के अंतर्गत वर्ष २०२५-२६ के लिए वारासिवनी जनपद की ६० ग्राम पंचायतों में १७७९ पात्र हितग्राहियों को एक साथ आवास की स्वीकृति तो मिल गई। लेकिन जमीनी स्तर पर पहली किस्त के आवंटन में हो रही देरी अब विवादो का कारण बनती जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार क्षेत्र की ६० पंचायतों में स्वीकृत कुल १७७९ आवासों के सापेक्ष अब तक लगभग १३०० से अधिक हितग्राहियों के खातों में ही राशि का आवंटन किया जा चुका है। यानी कि लगभग २५ प्रतिशत से अधिक पात्र हितग्राही आज भी पहली किस्त के लिए शासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। एक ही सूची में नाम होने के बावजूद कुछ लोगों को राशि मिल जाना और अन्य का वंचित रहना ग्रामीणों के बीच असंतोष का मुख्य कारण बना हुआ है।
पंचायत प्रतिनिधियों पर फूट रहा गुस्सा
किस्त मिलने में हो रही देरी से परेशान ग्रामीण अब सीधे अपनी ग्राम पंचायतों का रुख कर रहे हैं। सरपंच, सचिव और अन्य पंचायत कर्मियों को हितग्राहियों के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। परेशान ग्रामीणों का कहना है कि जब वे पात्र हैं और स्वीकृति मिल चुकी है। तो राशि डालने में भेदभाव या देरी क्यों की जा रही है स्थिति यह है कि पंचायतों में काम करना कर्मचारियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। वहीं सरपंच भी समस्या के समाधान के लिए जनपद पंचायत के चक्कर काट रहे हैं।
समय का संकट,गर्मी और बारिश की चुनौती
ग्रामीणों के आक्रोश के पीछे सबसे बड़ी वजह मौसम है वर्तमान में क्षेत्र भीषण गर्मी की चपेट में है। निर्माण कार्य के लिए यह समय सबसे उपयुक्त माना जाता है क्योंकि पुराने कच्चे मकानों को तोडक़र नया निर्माण शुरू करने के लिए सूखा मौसम जरूरी है। इस दौरान निर्माण कार्य की गति तेज रहती है, शासकीय कैलेंडर के अनुसार १५ जून के बाद मानसून की दस्तक हो जाती है। हवा तूफ ान और लगातार बारिश के चलते निर्माण कार्य पूरी तरह ठप हो जाता है। हितग्राहियों की मांग है कि यदि उन्हें तत्काल पहली किस्त मिल जाती है तो वे बारिश शुरू होने से पहले कम से कम प्लिंथ या आधा ढांचा तैयार कर लेंगे जिससे उनके परिवार को बारिश में खुले आसमान के नीचे नहीं रहना पड़ेगा।
तकनीकी खामियां या बजट की कमी
प्रशासनिक स्तर पर राशि आवंटन में देरी का कारण पोर्टल की तकनीकी समस्या या बजट आवंटन की प्रक्रिया बताई जा रही है। हालांकि जनपद पंचायत के अधिकारियों का कहना है कि वे इस प्रक्रिया को तेज करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि शेष हितग्राहियों को भी जल्द से जल्द लाभ मिल सके। यदि समय रहते शेष हितग्राहियों को राशि प्राप्त नहीं हुई तो आगामी मानसून सत्र उनके लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है। ग्रामीण क्षेत्र में बढ़ता असंतोष अब जनप्रतिनिधियों के लिए भी गले की हड्डी बनता जा रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस प्रशासनिक सुस्ती को तोडक़र कब तक आम आदमी के सपनों के आशियाने की पहली ईंट रखने का मार्ग प्रशस्त करता है।
आवास योजना की राशि नही डालने से हितग्राही परेशान है-किशोर तामेश्वर
सरपंच प्रतिनिधि किशोर तामेश्वर ने बताया कि अभी प्रधानमंत्री आवास में हमारे यहां जो नाम आए हुए हैं। उसमें कुछ हितग्राहियों को राशि डल चुकी है कुछ को राशि नहीं डली है ऐसे में उन्हें बारिश की समस्या आगे होने वाली है। बारिश के पहले रुपए उन्हें प्राप्त हो जाए यही सोचकर वह परेशान है ,क्योंकि जल्द उन्हें राशि मिलेगी तो वह पुराना मकान तोडक़र नया मकान बनाने का कार्य शुरू कर देंगे। परंतु अभी उन्हें पहली किस्त ही प्राप्त नहीं हो पाई है कुछ लोगों को प्राप्त हो गई है तो वह पंचायत में आकर कहते हैं कि सरपंच तुमने रुपए नहीं डाले कैसा कर रहे हो और बहुत तरीके से बातें बोलकर परेशान करते हैं। हम भी चाहते हैं की बारिश के पहले यदि इन्हें राशि मिल जाती है तो यह अपना आधा काम पूरा कर लेंगे आगे सहूलियत होगी वरना बारिश में इन्हें दिक्कत ही होना है।










































