पदमेश न्यूज़, बालाघाट। जनपद पंचायत कटंगी अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत लखनवाड़ा के वार्ड क्रमांक 4 स्थित पारंपरिक खिल्यामुठ्या स्थल पर कथित अतिक्रमण को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से अतिक्रमण हटाकर धार्मिक स्थल को मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग की है, ताकि वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं का निर्वहन बिना किसी बाधा के किया जा सके। अपनी इसी मांग को लेकर उन्होंने कलेक्टर कार्यालय में एक ज्ञापन सौपा है जिसमें उन्होंने जल्द से जल्द इस मामले में कार्रवाई किए जाने की गुहार लगाई है।
सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत पर किया जा रहा अवैध कब्जा,कार्यक्रम प्रभावित
ज्ञापन को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुचे ग्रामीणों ने बताया कि उनके ग्राम लखनवाड़ा के वार्ड नंबर 4 स्थित खिल्यामुठ्या देव भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है।खिल्यामुठ्या देव भूमि केवल एक स्थान नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का प्रतीक है। यहां प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में समाज के लोग एकत्र होकर पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं। यदि अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो भविष्य में धार्मिक आयोजनों और सामाजिक परंपराओं के संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।इसी को लेकर ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत एवं प्रशासन को आवेदन सौंपकर अतिक्रमण हटाने की मांग की है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर शीघ्र कार्रवाई करने का आग्रह किया है,ताकि आगामी दीपावली पर गोवर्धन पूजा एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रम पूर्व की भांति सुचारु रूप से आयोजित किए जा सकें।
यह भूमि हमारी आस्था का केंद्र है- गणेश सहारे
ज्ञापन को लेकर की गई चर्चा के दौरान ग्रामीण गणेश कुमार सहारे ने बताया कि ग्राम लखनवाड़ा के वार्ड क्रमांक 4 में स्थित खिल्यामुठ्या स्थल आदिवासी गोंड-गोवारी समाज की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां समाज के लोग कई वर्षों से दीपावली के अवसर पर गोवर्धन पूजा, गाय खिलाने सहित अन्य पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करते आ रहे हैं।उन्होंने आगे बताया कि कुछ लोगों द्वारा इस स्थल पर अवैध रूप से अतिक्रमण कर लिया गया है, जिससे धार्मिक आयोजनों के संचालन में कठिनाई उत्पन्न हो रही है। उन्होंने बताया कि इसके पूर्व भी कई बार इसी मांग को लेकर ज्ञापन सौपा गया है लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ, इसीलिए आज पुन: कलेक्टर कार्यालय आकर ज्ञापन सौपा गया है।हमारी मांग है कि जल्द से जल्द भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया जाए ताकि परंपराओं के अनुसार वर्षों से चले आ रहे कार्यक्रम आगे भी जारी रहे और भविष्य में किसी प्रकार के विवाद की स्थिति उत्पन्न ना हो।जिला प्रशासन ने इस मामले में निष्पक्ष जांच कराकर अवैध रूप से किए गए अतिक्रमण को तत्काल हटाना चाहिए।
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