खुले आसमान के नीचे हजारों क्विंटल धान

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सेवा सहकारी समिति एवं मार्केटिंग सोसायटियों के माध्यम से गत दिवस से शासन के निर्देश पर समर्थन मूल्य में धान खरीदी की जा रही है परन्तु परिवहन नही होने के कारण किसानों एवं समितियों को धान खरीदी करने में परेशानी हो रही है। साथ ही २९ दिसंबर को मौसम बिगडऩे और दिनभर आसमान में बादल छाया रहा है अगर तेज बारिश होती है तो सेवा सहकारी समितियों में खरीदी गई हजारों क्विंटल धान जो खुले आसमान के नीचे रखा हुआ है वह गीली हो सकती है जिससे किसानों के साथ ही समिति को भी काफी नुकसान हो सकता है क्योंकि खरीदी गई धान का जब तक परिवहन नही हो जाता है उसकी जवाबदारी समिति प्रबंधकों की है क्योंकि परिवहन होगा तभी किसानों के खातों में भुगतान होगा और अगर धान गीली हो गई तो जो नुकसान होगा उसकी भरपाई समिति को करनी पड़ेगी जिससे समिति प्रबंधक भी खासा परेशान नजर आ रहे है इसलिए शासन-प्रशासन से खरीदी गई धान का जल्द परिवहन करवाने की मांग कर रहे है। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक लालबर्रा के अंतर्गत बनाये गये १४ धान खरीदी केन्द्रों में २८ दिसंबर तक ३७६६ किसानों से १,७६,५३० क्विंटल ४० किग्रा. धान की खरीदी समर्थन मूल्य २१८३ रूपये प्रति क्विंटल की दर से की गई है परन्तु खरीदी गई धान का परिवहन नही होने से हजारों क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे रखा गया है और २९ दिसंबर से अचानक मौसम परिवर्तन होने के साथ ही बारिश होने की संभावना बनी हुई है इसलिए समिति के द्वारा परिसर में जो धान डम्प किया गया है जिससे मौसम बिगडऩे के कारण तिरपाल से ढककर बारिश से बचाने का प्रयास किया जा रहा है परन्तु अधिक धान डम्प होने के कारण सभी में तिरपाल ढकना मुश्किल है ऐसी स्थिति में अगर तेज बारिश होती है तो पुरी धान गीली हो जायेगी जिससे शासन को लाखों रूपये का नुकसान हो सकता है।

आपकों बता दे कि शासन के निर्देश पर गत दिवस से समर्थन मूल्य में सेवा सहकारी समिति एवं मार्केटिंग सोसायटी के द्वारा धान खरीदी की जा रही है और किसान स्लॉट बुक करवाकर जो तिथि मिली है उसके अनुसार खरीदी केन्द्र पहुंचकर अपनी उपज विक्रय कर रहे है परन्तु खरीदी गई धान का परिवहन नही होने के कारण लालबर्रा जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के अंतर्गत ९ सेवा सहकारी समिति के तहत बनाये गये १४ धान खरीदी केन्द्रों में खुले आसमान के नीचे हजारों क्विंटल धान पड़ा हुआ है, अगर तेज बारिश हो गई तो पुरी धान गीली हो सकती है। साथ ही परिवहन नही होने के कारण किसानों को अपनी उपज विक्रय करने एवं समिति को खरीदी करने में खासा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं मौसम परिवर्तन होने के कारण समिति के द्वारा पूर्व में खरीदी गई धान को डम्प कर सुरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है परन्तु जिन किसानों ने अपनी उपज विक्रय करने केन्द्र पहुंच चुके है उनका समय पर काटा नही होने के कारण किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ऐसी स्थिति मेें समय पर काटा नही होने पर उन्हे अपनी धान की रखवाली इस ठिठुरन ठंड में रात्रि के समय करनी पड़ रही है। वहीं किसानों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी के द्वारा विधानसभा चुनाव के पूर्व घोषणा की गई थी कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने पर ३१०० रूपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जायेगी परन्तु पुराने दाम २१८३ रूपये प्रति क्विंटल की दर से ही खरीदी की जा रही है जिससे किसानों में सरकार के प्रति आक्रोश व्याप्त है और सरकार के द्वारा घोषणा के अनुसार २१८३ रूपये को छोडक़र शेष राशि बोनस के रूप में देने की बात कही जा रही है जिससे जो किसान अधिया में दुसरे की खेती करते है उन्हे काफी नुकसान हो सकता है क्योंकि खेत मालिक किसानों को बोनस की राशि नही देने की बात कर रहे है जिससे अधियादार को काफी नुकसान हो सकता है। वहीं कुछ खेत मालिक अपने अधियादार के हिस्से के धान का बंटवारा कर अपनी पावती में उसे विक्रय नही कर रहे है जिससे किसान खासा परेशान है इसलिए किसानों के द्वारा शासन-प्रशासन से बोनस न देते हुए ३१०० रूपये समर्थन मूल्य में धान खरीदी की मांग की है ताकि खेत मालिक एवं अधियादार दोनो को लाभ मिल सके।

दूरभाष पर चर्चा में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक लालबर्रा के पर्यवेक्षक डीके लिल्हारे ने बताया कि शासन के निर्देश पर गत दिवस से समर्थन मूल्य में धान खरीदी की जा रही है और समर्थन मूल्य में अपनी उपज विक्रय करवाने के लिए ९८४८ किसानों ने पंजीयन करवाये है जिसमें से ३७६६ किसानों ने अपनी उपज विक्रय कर चुके है परन्तु परिवहन धीमी गति से हो रहा है जिसके कारण खरीदी करने में परेशानी हो रही है एवं २९ दिसंबर से मौसम परिवर्तन हो चुका है इसलिए खरीदी केन्द्र परिसर में डम्प धान को बारिश होने पर उसे बचाने के लिए तिरपाल ढककर बचाने का प्रयास कर रहे है परन्तु हजारों क्विंटल धान है अगर तेज बारिश होती है तो गीली हो सकती है इसलिए शासन-प्रशासन से मांग है कि तीव्र गति से परिवहन करवाये ताकि किसानों को उपज विक्रय करने एवं समिति को खरीदी करने में परेशानियों का सामना न करना पड़े। साथ ही यह भी बताया कि धान का परिवहन होने के बाद ही किसानों के खातों में पैमेेंट आयेगा परन्तु परिवहन नही होने से भुगतान भी नही हो रहा है जिससे किसान भी परेशान है।

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