दो दिनों की बहस के बाद लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक खारिज हो गया। केंद्र ने संसद का विशेष सत्र बुलाया था जो 16 अप्रैल को शुरू हुआ और 18 अप्रैल तक चला। 12 साल के शासन में मोदी सरकार को संसद में पहला बड़ा झटका लगा। राहुल गांधी, जयराम रमेश और एमके स्टालिन समेत विपक्ष के नेता इस घटनाक्रम पर जश्न मना रहे हैं। पीएम मोदी ने देश के नाम संदश देकर विपक्ष को निशाने पर भी लिया, लेकिन विपक्ष ने भी पलटवार करने में देर नहीं लगाई। इस घटनाक्रम से कई तरह के सवाल उभरे हैं। आखिर ये मोदी सरकार के लिए कितना बड़ा झटका है, या फिर ये कोई मास्टरस्ट्रोक है, क्या थी सरकार की मंशा और उसकी नजर कहां पर है, समझने की कोशिश करते हैं।
बीजेपी हारी या खेल गई मास्टरस्ट्रोक? समझें महिला आरक्षण बिल पर TMC को कैसे लग सकता है जोर का झटका
कौन-कौन से विधेयक गिरे, संसद में क्या हुआ?
केंद्र ने लोकसभा में तीन विधेयक पेश किए थे– संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 – जिसे महिला आरक्षण अधिनियम के नाम से भी जाना जाता है, उसमें संशोधन करना था। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को संसद ने सितंबर 2023 में लगभग सर्वसम्मति से पारित किया था। इसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान था। यह विधेयक शुक्रवार शाम को लोकसभा में आगे नहीं बढ़ पाया। सदन के नियमों के अनुसार, संविधान संशोधन विधेयक उपस्थित सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से ही पारित हो सकता था। पक्ष में 298 सांसदों के वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने विपक्ष में मतदान किया। इसके बावजूद, विधेयक को जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया। लोकसभा में 537 सांसद हैं, और विधेयक को पास कराने का जादुई आंकड़ा 360 वोट था। सत्तारूढ़ एनडीए में 240 भाजपा सांसदों सहित 293 सदस्य हैं, जिसमें साफ तौर पर 67 सीटों की कमी रह गई।
24 साल बाद गिरा कोई बड़ा बिल
ध्यान देने लायक बात है कि मोदी सरकार के 12 साल मे एक भी बिल नहीं गिरा है। जितने भी बिल पेश किए गए, सभी संसद की अग्निपरीक्षा में पास हुए। लेकिन पहली बार इतना अहम बिल लोकसभा में गिर गया। तो सवाल है कि सरकार ने इतना रिस्क क्यों लिया? अचानक झटका लेने को क्यों तैयार हुई सरकार? जब सरकार को पता था कि आंकड़ा उसके पक्ष में नहीं है, इसके बावजूद बिल को पेश क्यों किया गया? अगर पन्ने पलटकर देखें तो पाएंगे कि पिछले 24 साल के दौरान कोई भी सरकारी बिल नहीं गिरा था। लेकिन इस बार रिकॉर्ड टूट गया। साल 2002 में पोटा बिल गिरा था। उसके 24 साल बाद कोई बड़ा बिल सदन में गिरा है। 12 साल में मोदी सरकार का पहला बड़ा बिल गिरा है। ये तथ्य हर किसी को चौंका सकता है।










































