शहर के अवंतीबाई चौक स्थित दीनदयाल रसोई योजना गंदगी और अव्यवस्था के कारण पिछले दो दिनों से बंद पड़ी है। शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत जरूरतमंदों को मात्र 5 रुपये में पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन रसोई बंद होने से गरीब, मजदूर और जरूरतमंद लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार रसोई के समीप स्थित मटन मार्केट से निकलने वाला गंदा पानी और वहां से उठने वाली दुर्गंध लगातार समस्या का कारण बनी हुई है। बदबू और अस्वच्छ माहौल के चलते दीनदयाल रसोई का संचालन कर रहे निजी संचालक ने परेशान होकर फिलहाल रसोई का संचालन बंद कर दिया है। शहर की स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी नगर पालिका की है, लेकिन लंबे समय से इस समस्या के समाधान की ओर ध्यान नहीं दिया गया। परिणामस्वरूप शासन की जनहितकारी योजना प्रभावित हो रही है और इसका खामियाजा जरूरतमंद लोगों को भुगतना पड़ रहा है। दो दिनों से रसोई बंद होने के बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कब तक गरीबों की थाली गंदगी के कारण खाली रहेगी और नगर पालिका इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाएगी।
शहर में गरीब, श्रमिक और जरूरतमंद लोगों को मात्र पांच रुपए में पौष्टिक एवं स्वादिष्ट भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जा रही दीनदयाल रसोई योजना एक बार फिर अव्यवस्थाओं के कारण चर्चा में है। शहर के वार्ड क्रमांक 11 स्थित बूढ़ी रोड पर अवंतीबाई चौक के समीप संचालित दीनदयाल रसोई बीते दो दिनों से पूरी तरह बंद पड़ी हुई है। रसोई के मुख्य द्वार पर ताला लटका हुआ है, जिसके कारण रोजाना यहां भोजन करने आने वाले जरूरतमंद लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मध्य प्रदेश शासन द्वारा शुरू की गई यह महत्वाकांक्षी योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को कम कीमत में भरपेट भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। लेकिन बालाघाट में इस योजना के संचालन को लेकर पहले भी कई बार विवाद और शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इससे पूर्व भी अलग-अलग कारणों से रसोई का संचालन प्रभावित होता रहा है, जबकि शासन की इस महत्वपूर्ण योजना का नियमित संचालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इस बार रसोई बंद होने के पीछे जो कारण सामने आया है, उसने नगर पालिका की व्यवस्थाओं पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार रसोई के समीप स्थित मटन मार्केट से निकलने वाला गंदा पानी और वहां से फैल रही तीव्र दुर्गंध रसोई संचालन में सबसे बड़ी बाधा बन गई है। नगर पालिका के संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्वीकार किया कि रसोई पिछले दो दिनों से बंद है और इसकी प्रमुख वजह मटन मार्केट क्षेत्र की गंदगी है। कर्मचारियों के अनुसार मटन मार्केट से निकलने वाला दूषित पानी लगातार रसोई परिसर की ओर पहुंच रहा है। इसके साथ ही क्षेत्र में इतनी अधिक बदबू फैल रही है कि रसोई में कार्यरत कर्मचारियों के लिए काम करना मुश्किल हो गया है। हालात ऐसे बन गए कि न तो कर्मचारी वहां लंबे समय तक रुक पा रहे थे और न ही भोजन करने आने वाले हितग्राही एवं जरूरतमंद लोग उस वातावरण में बैठकर भोजन करना पसंद कर रहे थे। इसी स्थिति को देखते हुए फिलहाल रसोई संचालन बंद कर दिया गया। रसोई बंद होने का सबसे अधिक असर उन गरीब और जरूरतमंद लोगों पर पड़ा है, जो प्रतिदिन यहां पांच रुपए में भोजन कर अपना पेट भरते थे। रसोई के बाहर ऐसे कई लोग पहुंचे, जिन्हें रसोई बंद होने की जानकारी नहीं थी। भोजन की उम्मीद लेकर पहुंचे जरूरतमंद लोगों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। कुछ लोग लगातार रसोई के चक्कर लगाते हुए भी दिखाई दिए, लेकिन ताला बंद होने के कारण उन्हें भोजन नहीं मिल सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नगर पालिका समय रहते मटन मार्केट क्षेत्र की सफाई और जल निकासी व्यवस्था पर ध्यान देती तो यह स्थिति पैदा नहीं होती। उनका कहना है कि जिस स्थान पर गरीबों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, वहां स्वच्छता और साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था होना आवश्यक है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि दीनदयाल रसोई का संचालन दोबारा कब शुरू होगा और जरूरतमंद लोगों को पांच रुपए में मिलने वाला भोजन कब तक उपलब्ध हो सकेगा। अभी तक नगर पालिका या संबंधित विभाग की ओर से रसोई शुरू करने की कोई निश्चित समय-सीमा सामने नहीं आई है। ऐसे में गरीब और श्रमिक वर्ग के लोगों को फिलहाल इस योजना का लाभ मिलने का इंतजार करना पड़ रहा है। शासन की जनकल्याणकारी योजना होने के बावजूद अव्यवस्थाओं के कारण रसोई का बार-बार बंद होना न केवल योजना के उद्देश्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है, बल्कि उन लोगों की परेशानी भी बढ़ाता है, जिनके लिए यह योजना किसी सहारे से कम नहीं है। अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग जल्द से जल्द गंदगी और दुर्गंध की समस्या का समाधान कर रसोई का संचालन पुनः शुरू कराए, ताकि जरूरतमंदों को फिर से सस्ती और पौष्टिक भोजन सुविधा मिल सके।










































