जब अजीत डोभाल को लगा कि उनका करियर खत्म हो गया, साझा किया भावुक किस्सा

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अजीत डोभाल ने अपने 20 के दशक (युवावस्था) के दिनों को याद करते हुए बताया कि उस समय वे सिक्किम में तैनात थे और सीमा पार की गतिविधियों पर नजर रखना उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा था।Ajit Doval: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने शनिवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए अपने जीवन और करियर से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प और भावुक किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे एक युवा आईपीएस (IPS) अधिकारी के रूप में उन्हें एक समय लगा था कि उनका करियर पूरी तरह समाप्त हो गया है, जब उनके द्वारा सीमा निगरानी के लिए भेजी गई टीम को चीनी सेना (PLA) ने पकड़ लिया था।

क्या था पूरा मामला?

अजीत डोभाल ने अपने 20 के दशक (युवावस्था) के दिनों को याद करते हुए बताया कि उस समय वे सिक्किम में तैनात थे और सीमा पार की गतिविधियों पर नजर रखना उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा था। सिक्किम के भारत में विलय से ठीक पहले, उन्होंने सीमा की निगरानी के लिए अपनी एक टीम को 5 दिनों के मिशन पर भेजा था। 5 दिन का मिशन बीत जाने और 10 दिन होने के बाद भी जब टीम वापस नहीं लौटी, तो उनकी चिंता बढ़ गई।

चीनी कब्जे में टीम

इसके बाद उन्हें इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) मुख्यालय से एक फोन आया, जिसमें बताया गया कि उनकी पूरी टीम को चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने हिरासत में ले लिया है। डोभाल ने कहा, उस पल मुझे लगा कि मेरा करियर अब पूरी तरह खत्म हो गया है।जांच में डोभाल निर्दोष, फिर भी हुए गहरे दुखी

बाद में चीनी सेना ने पूरी टीम को बिना कोई नुकसान पहुंचाए रिहा कर दिया। घटना की उच्चस्तरीय जांच में पाया गया कि मुख्यालय द्वारा टीम को दिए गए नक्शे और रेखाचित्रों में गलतियां थीं, जिसके कारण टीम भ्रमित होकर सीमा पार कर गई थी। जांच में अजीत डोभाल की कोई गलती नहीं पाई गई और उन्हें पूरी तरह दोषमुक्त करार दिया गया। हालांकि, इसके बावजूद इस घटना ने उन्हें मानसिक रूप से गहराई से तोड़ दिया था। डोभाल ने कहा, मैं बहुत उदास था। वह जीवन का ऐसा दौर था जब आप खुद को बेहद निराश और हताश महसूस करते हैं।

तिब्बती शेरपा की सलाह से मिली जीवन की बड़ी सीख

इस मुश्किल और निराशाजनक दौर में एक तिब्बती शेरपा सहयोगी की सलाह ने अजीत डोभाल को जीवन का सबसे बड़ा पाठ पढ़ाया। उस शेरपा ने, जिन्होंने आठ बार माउंट एवरेस्ट फतह किया था और सालों बर्फ से ढकी चोटियों के बीच बिताए थे, डोभाल से कहा, यह सब केवल नक्शा पढ़ने का मामला है। कुछ लोग नक्शा सही ढंग से पढ़ते हैं, जबकि कुछ लोग इसे समझने में गलती कर बैठते हैं। इसके साथ ही शेरपा ने डोभाल को जीवन के तीन मूल मंत्र दिए, जिन्होंने उनके जीवन को गहराई से प्रभावित किया-

  • आप अभी कहां हैं?
  • आप कहां जाना चाहते हैं?
  • वहां पहुंचने और वापस आने का सही रास्ता क्या है?

NSA अजीत डोभाल ने छात्रों से कहा कि समय के साथ यह सलाह केवल पहाड़ों पर रास्ता खोजने का जरिया नहीं रही, बल्कि उनके लिए पूरे जीवन को देखने और कठिन परिस्थितियों से निकलने का एक दृष्टिकोण बन गई।

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