नई दिल्ली: अमेरिका-ईरान के बीच हाल में हुए शांति समझौते और होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने का स्वागत करते हुए फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया (एफएसयूआई) ने अमेरिकी प्रशासन से चार भारतीय नाविकों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है। यूनियन का कहना है कि क्षेत्र में हुए सैन्य हमलों और नाकेबंदी के कारण भारतीय नाविकों की जान गई, इसलिए न्याय सुनिश्चित करना स्थायी शांति के लिए जरूरी है।
एफएसयूआई ने सोशल मीडिया प्लेफॉर्म एक्स पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और व्हाइट हाउस को संबोधित संदेश में कहा कि अमेरिका को मृतक नाविकों के परिवारों को कम से कम 50 लाख डॉलर (5 मिलियन डॉलर) का उचित मुआवजा देना चाहिए। यूनियन ने इसे मानवीय और नैतिक जिम्मेदारी बताया है।
होर्मुज में हमले के बाद उठी मांग
- एफएसयूआई के अनुसार, चीफ इंजीनियर पतनाला सुरेश, डेक कैडेट आदित्य शर्मा और फिटर शिवानंद चौरेसिया की मौत मिसाइल हमले में हुई थी।
- यूनियन ने दूसरे अधिकारी निशांत उर्थनाथन की मौत के लिए मेडिकल मदद में हुई देरी और क्षेत्रीय नाकेबंदी को जिम्मेदार बताया है।
क्या था पूरा मामला?
- जून में ओमान तट के पास होर्मुज के निकट एमटी सेटेबेलो नामक तेल टैंकर पर अमेरिकी कार्रवाई हुई थी। जहाज पर 24 भारतीय चालक दल के सदस्य मौजूद थे। इस घटना में चार भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी जबकि अन्य को बचा लिया गया था।
- घटना के बाद भारत सरकार ने अमेरिका के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया और क्षेत्र में कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा पर चिंता जताई थी।
न्याय और सुरक्षा की मांग
एफएसयूआई का कहना है कि भारतीय नाविक किसी युद्ध का हिस्सा नहीं थे, बल्कि अपने परिवारों के लिए काम कर रहे थे। इसलिए उनकी मौत की जवाबदेही तय होनी चाहिए।










































