1 सितंबर 2026 से डिलीवरी कंपनी Dailyvery ने शिपिंग शुल्क में ₹4 प्रति पार्सल का इजाफा किया है। इस फैसले से फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसी ई-कॉमर्स साइट्स से खरीदारी महंगी हो जाएगी, जिसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा।यदि आप अक्सर ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं, तो 1 सितंबर 2026 से आपकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है। आगामी त्योहारी सीजन से ठीक पहले ई-कॉमर्स शिपिंग और लॉजिस्टिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी डेलीवरी (Delhivery) ने अपने डिलीवरी चार्जेस बढ़ाने का फैसला किया है। कंपनी ने अपने शिपिंग शुल्क में 4 रुपये प्रति पार्सल की बढ़ोतरी की घोषणा की है, जो 1 सितंबर से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू हो जाएगी। इस फैसले का सीधा असर फ्लिपकार्ट, अमेजन, मीशो जैसी प्रमुख ई-कॉमर्स वेबसाइटों के साथ-साथ उन सभी छोटे-बड़े प्लेटफॉर्म्स पर पड़ेगा जो डिलीवरी सेवाओं के लिए इस लॉजिस्टिक नेटवर्क का उपयोग करते हैं।
क्यों बढ़ी कीमतें?
लॉजिस्टिक कंपनियों द्वारा डिलीवरी चार्ज बढ़ाए जाने का मुख्य कारण बढ़ते परिचालन खर्च (Operating Costs) और ईंधन की कीमतों में हुआ बदलाव माना जा रहा है। त्यौहारी सीजन (Festive Season) की शुरुआत में देशभर में ऑनलाइन खरीदारी की मांग तेजी से बढ़ जाती है। ऐसे समय में लॉजिस्टिक कंपनियों को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर, कर्मचारियों और डिलीवरी नेटवर्क को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने पड़ते हैं। शिपिंग दरों में 4 रुपये का यह इजाफा देखने में भले ही छोटा लगे, लेकिन लाखों-करोड़ों पार्सल की कुल संख्या के हिसाब से यह एक बड़ा बजटीय अंतर पैदा करता है।
किन लोगों पर पड़ेगा असर?
इस फैसले का सीधा और सबसे बड़ा प्रभाव अंतिम उपभोक्ता यानी आम जनता पर ही पड़ने की पूरी संभावना है। ई-कॉमर्स कंपनियां और ऑनलाइन सेलर्स अपने बढ़ते हुए शिपिंग खर्च का बोझ आमतौर पर ग्राहकों पर ही डालते हैं। इसका मतलब यह है कि 1 सितंबर के बाद जब आप किसी ऑनलाइन शॉपिंग ऐप से कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू सामान या कोई अन्य उत्पाद ऑर्डर करेंगे, तो आपको बिल में पहले की तुलना में अधिक डिलीवरी फीस देखने को मिल सकती है। छोटी कीमत वाले सामानों पर यह अतिरिक्त चार्ज ग्राहकों की जेब पर ज्यादा भारी महसूस हो सकता है।ई-कॉमर्स विक्रेताओं (Sellers) और छोटे व्यवसायों के लिए भी यह बदलाव किसी चुनौती से कम नहीं है। डिलीवरी महंगी होने से या तो उन्हें अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ानी पड़ेंगी या फिर अपने प्रॉफिट मार्जिन में कटौती करनी होगी। खासकर उन सेलर्स को ज्यादा दिक्कत आ सकती है जो ‘फ्री डिलीवरी’ का विकल्प देकर ग्राहकों को आकर्षित करते हैं, क्योंकि अब फ्री डिलीवरी की सेवा देना उनके लिए और अधिक खर्चीला साबित होगा।










































