हर्षोल्लास के साथ मनाया गया श्रावण पूर्णिमा उत्सव

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विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों के हुए आयोजन,
जिला स्तरीय त्रिरत्न बौद्ध विहार पहुंचे बड़ी संख्या में बौद्ध अनुयायी
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पदमेश न्यूज। बालाघाट। श्रावण मास की पूर्णिमा के अवसर पर शुक्रवार को जिला मुख्यालय सहित जिले की विभिन्न तहसीलों एवं ग्रामीण अंचलों में बौद्ध अनुयायियों द्वारा श्रावण पूर्णिमा उत्सव हर्षोल्लास, श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न स्थानों पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किए गए।इसी कड़ी में नगर के समीप कोसमी बौद्ध नगर स्थित जिला स्तरीय त्रिरत्न बौद्ध विहार में भी विशेष रूप से श्रावण पूर्णिमा उत्सव आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में उपासक, उपासिकाएं, बौद्ध धर्म अनुयायी एवं सजातीय बंधु शामिल हुए।
बहुजन संघ, धम्मराज एवं धम्म वर्ग के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विहार परिसर में धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।श्रावण पूर्णिमा उत्सव के अवसर पर परित्राण पाठ, बुद्ध वंदना, ध्यान साधना, धम्म परिक्रमा, धर्म प्रवचन एवं सामूहिक भोजनदान सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। सुबह से ही बौद्ध अनुयायियों के विहार पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था।

धम्म के मार्ग पर चलने का दिया संदेश
कार्यक्रम के दौरान पूज्य भदंत धम्म शिखर ने उपस्थित बौद्ध अनुयायियों को धम्मोपदेश देते हुए मनुष्य जीवन में शांति, संयम, करुणा और सदाचार के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने जीवन से नकारात्मक विचारों और नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मक चिंतन एवं धम्म के मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए। मन की शांति के लिए ध्यान साधना अत्यंत उपयोगी है और व्यक्ति को अपने आचरण में मैत्री, करुणा तथा मानवता के भाव को अपनाना चाहिए।प्रवचन के दौरान बौद्ध धर्म के मूल सिद्धांतों और मानव कल्याण के संदेश पर भी विस्तार से चर्चा की गई।उपासक उपासिकाओ ने भदंत के प्रवचन को ध्यानपूर्वक सुना और धम्म के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

पूजा-वंदना से लेकर धम्म परिक्रमा तक हुए कार्यक्रम
श्रावण पूर्णिमा उत्सव के तहत त्रिरत्न बौद्ध विहार में परित्राण पाठ एवं पूजा-वंदना के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने ध्यान साधना की। धम्म परिक्रमा में शामिल होकर अनुयायियों ने भगवान बुद्ध के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। धर्म प्रवचन के माध्यम से उपस्थित लोगों को बुद्ध के उपदेशों और उनके व्यावहारिक महत्व से अवगत कराया गया।
आयोजन के दौरान सामूहिक भोजनदान का भी कार्यक्रम रखा गया। कार्यक्रम में शामिल सभी उपासक-उपासिकाओं एवं बौद्ध धर्म अनुयायियों ने एक साथ भोजन ग्रहण किया। पूरे दिन विहार परिसर में धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।

बौद्ध धर्म मानव कल्याण का मार्ग
आयोजकों ने बताया कि जिला स्तरीय त्रिरत्न बौद्ध विहार में प्रत्येक पूर्णिमा के अवसर पर धार्मिक एवं धम्म आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। श्रावण पूर्णिमा उत्सव भी इसी परंपरा के तहत मनाया गया। कार्यक्रम के दौरान धम्म ज्ञान का प्रसार करते हुए बौद्ध अनुयायियों को भगवान बुद्ध की शिक्षाओं से अवगत कराया गया।प्रवचन में बताया गया कि बौद्ध धर्म मानवता, करुणा, मैत्री, प्रज्ञा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित जीवन पद्धति है। भगवान बुद्ध ने अंधविश्वास और कट्टरता से दूर रहकर विवेक, अनुभव और सत्य के आधार पर जीवन जीने का संदेश दिया। उनके बताए मार्ग पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन में शांति और समाज में समरसता स्थापित करने का प्रयास कर सकता है।
Byte भदन्त धम्मशिखर

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