सांदीपनि स्कूलों की लागत 10 हजार करोड़, लेकिन प्रदर्शन औसत सुविधाओं वाले स्कूलों से भी कम

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भोपाल। शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के बड़े दावों के साथ शुरू किए गए सीएम राइज और फिर सांदीपनि विद्यालय अपेक्षित परिणाम देने में पिछड़ते नजर आ रहे हैं। 10 हजार करोड़ रुपये खर्च कर अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की गईं, लेकिन मप्र बोर्ड के हालिया नतीजों में ये स्कूल औसत संस्थानों की बराबरी भी नहीं कर पाए, जिससे पूरी योजना की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रदेश के सांदीपनि विद्यालयों का 10वीं का परिणाम 88 और 12वीं का 87.17 प्रतिशत रहा।

10वीं में तो गत वर्ष जैसी स्थिति रही, हालांकि 12वीं में मामूली सुधार जरूर हुआ है। यहां तीन प्रतिशत की वृद्धि मिली। अब राज्य स्तरीय मेधावी सूची की बात करें तो 10वीं में 378 में से केवल 46 और 12वीं में 169 में से 17 सिर्फ विद्यार्थियों ने जगह बनाई है। शिक्षाविदों का कहना है कि सिर्फ स्कूलों का भवन बनाने से नहीं, बल्कि शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार करना होगा।भोपाल में आठ सांदीपनि, एक भी विद्यार्थी मेरिट में नहीं

भोपाल जिले के सांदीपनि विद्यालयों को देखा जाए तो स्थिति बेहद निराशाजनक है। यहां का एक भी विद्यार्थी मेरिट में स्थान नहीं बना पाया। चार साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो भोपाल जिले के आठ सांदीपनि विद्यालयों में चार का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है। चार स्कूलों के परिणाम में सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी उत्कृष्ट और मॉडल स्कूलों के परिणाम से कम हैं। जबकि इन स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। स्कूलों में तमाम सुविधाएं जैसे प्रशिक्षित व परीक्षा पास शिक्षक, सर्वसुविधायुक्त लाइब्रेरी, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, स्मार्ट क्लास रूम, बस सहित कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

प्रशिक्षण पर करोड़ों रुपये खर्च

सांदीपनि विद्यालयों के शिक्षकों को प्रशिक्षण देने में करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद भी शैक्षणिक गुणवत्ता नहीं सुधर पा रही है। इन स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता भी पर्याप्त है। यहां के शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में भी नहीं लगाया जाता है। इसके बावजूद राजधानी के सांदीपनि विद्यालय का एक भी विद्यार्थी मेरिट सूची में शामिल नहीं हो पा रहा है।—-

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