बाबा गुलशन शाह और यार खां का ६०वां सालाना उर्स संपन्न

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पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। नगर की ऐतिहासिक और धार्मिक आस्था का केंद्र मानी जाने वाली दरगाह हजरत बाबा गुलशन शाह रहमत अलैह एवं हजरत बाबा यार खां रहमत अलैह का ६०वां सालाना उर्स इस वर्ष भी अकीदत और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। गुलशन शाह यार खाँ शाह उर्स कमेटी के तत्वाधान में आयोजित यह तीन दिवसीय धार्मिक समागम १४ अप्रैल से प्रारंभ होकर १६ अप्रैल को कव्वाली के साथ संपन्न हुआ।

धार्मिक रस्मों के साथ हुआ उर्स का आगाज

उर्स का विधिवत प्रारंभ १४ अप्रैल को किया गया प्रथम दिन दरगाह शरीफ पर गुस्ल पवित्र स्नान की रस्म अदायगी की गई। जिसके उपरांत परचम कुसाई यानि ध्वजारोहण किया गया। इन पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के साथ ही तीन दिनों तक चलने वाले उर्स की शुरुआत हुई। जिसमें पहले ही दिन से जायरीन का हुजूम उमडऩा शुरू हो गया था।

शाही संदल और चादर पोशी की रही धूम

उर्स के दूसरे दिन उर्स कमेटी के तत्वाधान में १५ अप्रैल को नगर में भव्य शाही संदल निकाला गया। यह संदल नगर के इमाम बाड़े से प्रारंभ होकर विभिन्न चौक चौराहों और गलियों का भ्रमण करते हुए दरगाह शरीफ पहुंचा। संदल के दौरान अकीदतमंदों का उत्साह देखते ही बनता था जहाँ लोगों ने झूमते गाते हुए अपनी आस्था प्रकट की। अंतिम दिवस पर वार्ड नंबर २ से एक और संदल निकाला गया जो पूरे नगर का भ्रमण करते हुए कब्रिस्तान दरगाह गुलशन बाबा एवं यार खान बाबा की दरगाह पहुंचा। यहाँ पूरी धार्मिक रीति रिवाजों के साथ चादर पेश कर मुल्क में अमन.चैन की दुआएं मांगी गईं।

दिल्ली और छिंदवाड़ा के कव्वालों ने बांधा समां

सांस्कृतिक आकर्षण के केंद्र के रूप में आयोजित कव्वाली के प्रोग्राम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। १५ अप्रैल को छिंदवाड़ा चंदामेटा के मशहूर कव्वाल रौशन आजाद ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियों से शमा महफिल को रोशन किया। वहीं १६ अप्रैल को दिल्ली के सुप्रसिद्ध कव्वाल रिहान अली ने सूफि याना कलाम पेश किए जिसका आनंद लेने के लिए दर्शक देर रात तक डटे रहे। कव्वाली के दौरान श्रोताओं का उत्साह ऐसा था कि वे कलाकार पर नजराने इनाम की बारिश करते नजर आए।

लंगर और जन सैलाब सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल

उर्स कमेटी के अनुसार इस दरगाह से केवल मुस्लिम समाज ही नहीं बल्कि गैर मुस्लिम समाज की भी गहरी आस्था जुड़ी हुई है। उर्स के तीनों दिन लंगर का आयोजन किया गया जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। अंतिम दिन विशेष लंगर का आयोजन हुआ जिसमें जिले के अलावा अन्य जिलों से आए जायरीन ने भी शिरकत की। उर्स कमेटी के सदस्यों ने कार्यक्रम की सफ लता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बाबा की ख्याति दूर.दूर तक फैली है। यही कारण है कि प्रतिवर्ष यहां आने वाले भक्तों की संख्या बढ़ रही है। १६ अप्रैल की देर रात कव्वाली के समापन के साथ ही इस तीन दिवसीय उत्सव का शांतिपूर्ण समापन हुआ। सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस का भी सहयोग सराहनीय रहा।

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