पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। मध्यप्रदेश शासन के द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूं, चना और सरसों के उपार्जन का कार्य तो प्रारंभ कर दिया गया है। लेकिन धरातल पर तकनीकी खामियों ने किसानों की कमर तोड़ दी है। वारासिवनी विकासखंड में सैटेलाइट गिरदावरी और पोर्टल की समस्याओं के कारण किसान अपनी उपज बेचने के लिए दर दर भटकने को मजबूर हैं। इसमें किसान समिति में स्लॉट बुक करने जा रहे हैं जहां पर उनके पंजीयन में पोर्टल पर सेटेलाइट के माध्यम से सत्यापन असफल बता रहा है। जिससे वह बहुत ज्यादा परेशान है और किसानों में आक्रोश व्याप्त है।
वारा वेयरहाउस को बनाया केंद्र, सन्नाटा पसरा
क्षेत्र में वृहत्तकार सेवा सहकारी समिति वारासिवनी का वारासिवनी बालाघाट मार्ग पर स्थित ग्राम वारा के मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन को खरीदी केंद्र बनाया गया है। १५ अप्रैल से खरीदी प्रक्रिया शुरू तो हुई लेकिन खरीदी केंद्र पर किसान अपनी उपज लाने के बजाय समस्याओं का समाधान खोजने पहुंच रहे हैं। पंजीकृत किसानों का आरोप है कि शासन के द्वारा इस वर्ष सैटेलाइट गिरदावरी का नियम लागू कर किसानों के अनुसार उलझाया जा रहा हैं। जब किसान अपनी उपज बेचने के लिए स्लॉट बुक करने का प्रयास कर रहे हैं, तो पोर्टल पर सैटेलाइट गिरदावरी नही होने का कारण दर्शाते हुए बुकिंग रिजेक्ट की जा रही है। बताया जा रहा है कि शासन के द्वारा सैटेलाइट गिरदावरी की पुष्टि के लिए किसानों के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर फ ोन कॉल किए गए थे। कई किसान नेटवर्क की समस्या या अन्य कारणों से फ ोन रिसीव नहीं कर पाए जिसके चलते अब उनका डेटा पोर्टल पर अपडेट नहीं हो रहा है।
पटवारी गिरदावरी बनाम सैटेलाइट सर्वे
स्थानीय स्तर पर पटवारियों के द्वारा भौतिक सत्यापन कर गिरदावरी की जा चुकी है जिसके आधार पर पंजीयन भी हुआ। लेकिन अब पोर्टल केवल सैटेलाइट डेटा को ही मान्य कर रहा है जिससे विरोधाभास की स्थिति निर्मित हो गई है। किसानों को परेशानी पंजीयन के समय से ही शुरू हो गई थी। अंतिम १० दिनों में सर्वर डाउन रहने के कारण वारासिवनी में महज ३०० के करीब ही पंजीयन हो पाए जबकि सैकड़ों किसान पंजीयन से वंचित रह गए। अब जो पंजीकृत हैं वे स्लॉट बुकिंग के लिए २५ किलोमीटर की दूरी तय कर समिति और खरीदी केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं। जहाँ पटवारी गिरदावरी को पोर्टल असत्यापित बता रहा है।
किसान को फसल औने पौने दाम पर बेचने का डर
खरीदी केंद्र पर मौजूद कर्मचारियों ने भी इस समस्या पर अपनी असमर्थता जताई है जिससे किसानों में शासन प्रशासन के प्रति भारी आक्रोश है। क्योंकि अगर शासन समय पर उपज नहीं खरीदेगा तो किसानो को मजबूरी में बिचौलियों और व्यापारियों को अपनी फ सल कम दाम पर बेचनी पड़ेगी। इससे उन्हें सीधा आर्थिक नुकसान होगा। वारासिवनी क्षेत्र के किसानों ने मांग की है कि सैटेलाइट गिरदावरी की तकनीकी त्रुटियों को तत्काल सुधारा जाए और पटवारी के द्वारा की गई भौतिक गिरदावरी को आधार मानकर स्लॉट बुकिंग शुरू की जाए। ताकि किसान अपनी मेहनत की कमाई का सही मूल्य प्राप्त कर सकें।
पोर्टल में सैटेलाइट गिरदावरी नही होने के कारण स्लॉट बुक नही हो रहा है-धर्मदास डहाके
किसान धर्मदास डहाके ने बताया की हम लिंगमारा के रहने वाले हैं हमारे द्वारा रबी की फ सल में गेहूं की बुवाई की गई थी। जिसकी फ सल कटाई कर शासन को देने के लिए तैयार हो गई है इस संबंध में हमारे द्वारा पूर्व में पंजीयन भी करवा लिया गया था। अभी हम शासन को अपनी फसल देने के लिए स्लॉट बुक करने के लिए आए हुए थे। परंतु पोर्टल में सैटेलाइट गिरदावरी ना होने के कारण स्लॉट बुक समर्थ बताया जा रहा है। जिसके लिए समिति अधिकारी कर्मचारियों से हमारे द्वारा चर्चा की गई है परंतु कोई हल अभी निकला नहीं है यदि ऐसा ही रहा तो हमें नुकसान सहन करना पड़ेगा।
स्लॉट बुक नही होने से शासन को फसल नही बेच पा रहे है-चिंतामन डहाके
चिंतामन डहाके ने बताया की हम समिति स्लॉट बुक करवाने के लिए आए हुए थे परंतु यहां पर स्लॉट बुक नहीं हो पा रहा है। ऐसे में शासन को गेहूं की फ सल देने की समस्या उत्पन्न हो गई है यहां कोई सैटेलाइट गिरदावरी की बात कही जा रही है। जबकि पूर्व में पटवारी के द्वारा गिरदावरी की गई थी जिसके आधार पर हमारा पंजीयन हुआ है। उस समय भी भारी दिक्कत का सामना कर पंजीयन करना पड़ा दिन रात चक्कर लगाने पड़े और अब यह स्लॉट बुक करना भी सर दर्द हो गया है। शासन को इस प्रकार से हो रही अव्यवस्थाओं पर ध्यान देना चाहिए और इसके सुधार करने चाहिए परंतु शासन के द्वारा जो किया जा रहा है यह ठीक नहीं है। मेरे जैसे कई किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है विकासखंड का इकलौता केंद्र है जिसकी सोसायटी में सुबह से किसान चक्कर लगा रहे हैं। परंतु किसी का भी स्लॉट बुक नहीं हो पा रहा है हमारी मांग है कि शासन प्रशासन इधर गंभीरता से ध्यान देकर व्यवस्था बनाएं।
गिरदावरी को असत्यापित बता रहे है अधिकारियों को सूचना दे दी गई है-रविंद्र पारधी
खरीदी प्रभारी रविंद्र पारधी ने बताया कि किसानों का स्लॉट बुक करने के लिए जाते हैं तो उसमें सेटेलाइट के माध्यम से सत्यापन असफ ल बता रहा है। सैटेलाइट का जो सर्वे हुआ था उसमें किसानों ने फ ोन नहीं उठाया जिससे उनकी फ सल असत्यापित कर दी गई है। अभी पंजीयन असत्यापित बता रहा है किसान भी जागरुक है कई फ ोन कॉल आते हैं जिसमें कंपनी या फ्रॉड की संभावना रहती है जिससे बचने उसे नहीं उठाते हैं। जबकि पटवारी ने जो गिरदावरी की थी उसके आधार पर किसानों का पंजीयन हुआ था आज वही गिरदावरी को असत्यापित बता रहे हैं। इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दे दी गई है। यह खरीदी १५ अप्रैल से प्रारंभ हुई है इसमें ३०० किसानों के पंजीयन है जिसमें से चार किसानो के स्टॉल अभी तक बुक हुए हैं। बाकी सुबह से करीब ४० किसान स्लॉट बुक नही होने से वापस लौट गए हैं।










































