संसद में नारीशक्ति वंदन संशोधन का जिन भी दलों ने विरोध किया है, वे नारी शक्ति को बहुत ही सहजता से ले रहे हैं। महिलाएं इस घटना को कभी नहीं भूलेंगी।” महिला आरक्षण विधेयक (Women Reservation Bill) संसद में पारित न होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं से क्षमा मांगी। हालांकि, सरकार ने इस विधेयक को कानून बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी थी, लेकिन विपक्ष का साथ सत्तापक्ष को नहीं मिला।
संसद में इस विधेयक को पारित कराने के लिए आवश्यक संख्या बल 352 था, जिससे सरकार 54 मत पीछे रह गई। सदन में उपस्थित कुल 352 सदस्यों में से 230 सदस्यों ने इस विधेयक के विरुद्ध मतदान किया। पिछले 12 वर्षों में यह पहला अवसर है जब मोदी सरकार का कोई संविधान संशोधन विधेयक सदन में गिर गया है। विपक्षी दलों में इस बात का हर्ष था कि मोदी सरकार को पराजय का सामना करना पड़ा।
हालांकि, सियासी पिक्चर तो सदन में विधेयक के विफल होने के बाद शुरू हुई। अमूमन सड़कों से उठी आवाज संसद तक पहुंचती है, लेकिन इस बार संसद की गूंज सड़कों पर सुनाई दे रही है। संसद में विधेयक के विफल होने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के दामन पर ‘महिला विरोधी’ होने का कलंक लगा दिया है।









































