Defence Multibagger Stock : डिफेंस, माइनिंग और रेलवे सेक्टर में काम करने वाले इस शेयर ने लिस्टिंग के बाद से 14,206% से ज्यादा का Multibagger रिटर्न दे चुका है। अब इसे डिफेंस मिनिस्ट्री से मिले 590 करोड़ के ऑर्डर मिला है। इसकी वजह से आज यह शेयर 1.77% की तेजी के साथ 1,774 रुपये पर बंद हुआ है। वहीं, पिछले 5 दिन में करीब 7% और 1 महीने में 27% का रिटर्न दिया है।
मल्टीबैगर रैली ने बनाया दिग्गज
BEML का शेयर लिस्टिंग के बाद ₹12.40 के स्तर से उछलकर ₹2437 तक पहुंच चुका है। इस दौरान स्टॉक ने 14,000% से ज्यादा का रिटर्न दिया है, जो इसे डिफेंस सेक्टर के बड़े मल्टीबैगर स्टॉक्स में शामिल करता है। हालिया ट्रेंड भी मजबूत है, जहां पिछले 1 महीने में करीब 27% और 5 दिनों में 7% की तेजी देखने को मिली है।
₹590 करोड़ का ऑर्डर बना बड़ा ट्रिगर
कंपनी को रक्षा मंत्रालय से करीब ₹590 करोड़ का बड़ा ऑर्डर मिला है, जिसमें ट्रॉल असेंबली की सप्लाई शामिल है। यह ऑर्डर कंपनी के डिफेंस बिजनेस को मजबूती देता है और आने वाले समय में रेवेन्यू विजिबिलिटी को बढ़ाता है।
बिजनेस मॉडल में मल्टी-सेक्टर का दम
BEML सिर्फ डिफेंस कंपनी नहीं है, बल्कि यह माइनिंग, कंस्ट्रक्शन और रेलवे सेक्टर में भी मजबूत पकड़ रखती है। कंपनी की करीब 50% कमाई माइनिंग और कंस्ट्रक्शन से आती है, जबकि रेलवे और मेट्रो से 27% और डिफेंस से 23% रेवेन्यू मिलता है। यही डायवर्सिफिकेशन इसे स्थिर बनाता है।
ऑर्डर बुक और ग्लोबल मौजूदगी
कंपनी के पास 12,700 करोड़ रुपये से ज्यादा की मजबूत ऑर्डर बुक है, जो आने वाले समय में ग्रोथ की विजिबिलिटी देती है। BEML ने अब तक 71 देशों में 1300 से ज्यादा इक्विपमेंट सप्लाई किए हैं, जिससे इसकी ग्लोबल मौजूदगी भी मजबूत है।
R&D और सरकारी सपोर्ट
कंपनी लगातार R&D पर निवेश बढ़ा रही है और अपने प्रोडक्ट्स का 70% हिस्सा खुद की डेवलपमेंट से आता है। इसके अलावा, सरकार की डिफेंस इंडिजेनाइजेशन और ‘मेक इन इंडिया’ पॉलिसी का भी कंपनी को सीधा फायदा मिल रहा है।
जोखिम क्या हैं?
कंपनी के लिए सबसे बड़ा जोखिम क्लाइंट कंसंट्रेशन है। इसके टॉप 3 क्लाइंट्स जैसे Coal India, DMRC और Indian Railways से ही 60% से ज्यादा रेवेन्यू आता है। इसके अलावा, सरकारी नीतियों और ऑर्डर साइकिल पर निर्भरता भी बनी रहती है। BEML एक मजबूत ऑर्डर बुक और मल्टी-सेक्टर एक्सपोजर के साथ लंबी रेस का खिलाड़ी दिखता है। हालांकि, हालिया तेजी के बाद एंट्री करते समय वैल्यूएशन और मार्केट करेक्शन का जोखिम ध्यान में रखना जरूरी है।










































