जहां रहती थी पर्यटकों से चहल-पहल, वहां अब सन्नाटा, बरगी हादसे का दर्द अब भी जिंदा

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जबलपुर। वीकेंड में यहां रोज सैकड़ों लोग पहुंचते थे, लेकिन 30 अप्रैल को हुए क्रूज हादसे के बाद पूरा नजारा बदल गया है। इस हादसे से सिस्टम की पोल खोल दी। आधी अधूरी तैयारी के साथ पर्यटकों को क्रूज में सफर करवाना महंगा साबित हुआ और क्रूज हादसे में 14 लोगों की मौत हो गई। जिसके बाद वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियाें को बंद कर दिया गया।

इस फैसले के बाद बरगी डैम की रौनक खत्म हो गई

बरगी बांध के किनारे अब पहले जैसी रौनक नहीं दिखती। जहां कभी बच्चों की आवाजें, मोटर बोट की गूंज और पर्यटकों की भीड़ रहती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है। हादसे के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हुई।

आजीविका पूरी तरह पर्यटन पर निर्भर थी

मामला अदालत तक पहुंचा और राज्य सरकार ने जांच आयोग गठित कर 90 दिन का समय मांगा है। लेकिन इस बीच सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ा है, जिनकी आजीविका पूरी तरह पर्यटन पर निर्भर थी।

पूरे दिन में 50 से 100 रुपये की कमाई भी मुश्किल से

बरगी नगर निवासी प्रीति बर्मन पिछले सात वर्षों से बांध के पास फल और नाश्ते का सामान बेचकर परिवार का गुजारा कर रही हैं। वह बताती हैं कि पहले रोज 300 से 400 रुपये तक की बिक्री हो जाती थी, लेकिन अब पूरे दिन में 50 से 100 रुपये की कमाई भी मुश्किल से हो पाती है।

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