पदमेश न्यूज़। बालाघाट। केवल बालाघाट नगर ही नहीं बल्कि संपूर्ण जिले में आवारा कुत्तों का आतंक इन दिनों कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है। लगातार सामने आ रही इन्हीं घटनाओं के बीच रविवार को ग्राम पीपल टोला (मेंढकी) के सामने पहाड़ी क्षेत्र में लावारिस कुत्तों के झुंड ने एक चीतल पर हमला कर दिया। करीब 10 से 12 कुत्तों से घिरे चीतल ने जान बचाने के लिए तालाब में छलांग लगा दी, लेकिन कुत्तों ने तालाब में उतरकर उसका पीछा करना जारी रखा। इसी बीच आसपास खेतों में काम कर रहे मजदूरों ने किसी तरह कुत्तों को वहां से भगाया, जिसके बाद घायल चीतल तालाब के किनारे बैठा मिला। वह इतनी बुरी तरह घायल था कि खड़ा भी नहीं हो पा रहा था।
डीएफओ ने लिया मामले का संज्ञान,रेंज ऑफिस कर्मचारियों को दिए रेस्क्यू के निर्देश
बताया गया कि घटना ग्राम मेंढकी स्थित एक फार्म हाउस के समीप तालाब की पार के किनारे हुई। घटना की जानकारी मिलने पर नशा मुक्ति अभियान प्रमुख धनेंद्र हनवत मौके पर पहुंचे और घायल चीतल की स्थिति देखने के बाद वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। उन्होंने डीएफओ बालाघाट से चर्चा कर चीतल का तत्काल रेस्क्यू कर उपचार कराने का आग्रह किया। इसके बाद डीएफओ ने रेंज ऑफिस वारासिवनी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
लावारिस कुत्तों से वन्यजीवों को खतरा
घटना ने जंगल और उससे लगे ग्रामीण क्षेत्रों में घूमने वाले लावारिस कुत्तों से वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीण क्षेत्रों में कुत्तों के झुंड द्वारा वन्य प्राणियों का पीछा किए जाने और उन पर हमला करने की घटनाएं वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। विशेष रूप से चीतल, सांभर और अन्य छोटे वन्यजीव इनके आसान शिकार बन सकते हैं।ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि कोई व्यक्ति वन्यजीवों के अवैध शिकार के लिए कुत्तों का इस्तेमाल करता है तो इसकी जांच की जानी चाहिए। हालांकि, इस संबंध में किसी व्यक्ति के खिलाफ फिलहाल कोई तथ्य सामने नही आए है।
रेस्क्यू और सुरक्षा व्यवस्था की मांग
धनेंद्र हनवत ने वन विभाग से घायल चीतल को तत्काल रेस्क्यू कर समुचित उपचार उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही जंगल एवं वन्यजीव क्षेत्रों में घूम रहे लावारिस कुत्तों की समस्या के समाधान, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और यदि वन्यजीवों के अवैध शिकार में कुत्तों के इस्तेमाल की कोई शिकायत या प्रमाण सामने आता है तो उसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए स्थानीय लोगों की सहभागिता भी जरूरी है। वन्यजीव और जंगल सुरक्षित रहेंगे, तभी क्षेत्र का पर्यावरणीय संतुलन कायम रह सकेगा










































