ग्वालियर। प्रदेश में स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर एक बेहद सुखद बदलाव देखने को मिला है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-छह के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में अब हर तीन में से लगभग दो से अधिक नागरिक किसी न किसी स्वास्थ्य बीमा या वित्तीय योजना के दायरे में सुरक्षित हैं।इस रिपोर्ट की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य बीमा के मामले में प्रदेश के ग्रामीण इलाकों ने शहरी क्षेत्रों को काफी पीछे छोड़ दिया है। यह बदलाव प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे में आ रहे जमीनी सुधारों और सरकारी योजनाओं जैसे आयुष्मान भारत योजना की सफलता को बयां करता है।लगभग दोगुना हुआ दायरा गांवों में 76 प्रतिशत परिवार सुरक्षित
पिछले सर्वे (एनएफएचएस-5) की तुलना में प्रदेश में स्वास्थ्य बीमा का कवरेज लगभग दोगुना हो गया है। एनएफएचएस-पांच के दौरान प्रदेश में केवल 38.1 प्रतिशत परिवार ही किसी स्वास्थ्य बीमा योजना से जुड़े थे, जो अब एनएफएचएस-छह में बढ़कर 73.6 प्रतिशत हो गए हैं।
शहरों से आगे निकले गांव
जहां शहरों में 67.2 प्रतिशत सामान्य सदस्य स्वास्थ्य बीमा के दायरे में हैं, वहीं ग्रामीण भारत में यह आंकड़ा 76.0 प्रतिशत पर पहुंच गया है। यानी ग्रामीण क्षेत्रों के 100 में से 76 परिवारों के पास अब इलाज के लिए वित्तीय सुरक्षा कवच मौजूद है।
इसलिए आया यह बदलाव
स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इस बदलाव के पीछे केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाएं हैं। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना ने सीधे तौर पर ग्रामीण और गरीब परिवारों को कवर किया है। इसके अलावा, कोरोना महामारी के बाद से लोगों में स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी जागरूकता ने भी इस आंकड़े को बढ़ाने में मदद की है।










































