सीमेंट के दाम बढ़ेंगे या नहीं? HDFC सिक्योरिटीज की रिपोर्ट में हुआ ये खुलासा

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Cement Prices : देश के सीमेंट इंडस्ट्री के लिए चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (Q2FY27) काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाली है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज की हाल की रिपोर्ट के अनुसार, इस तिमाही में सीमेंट की कीमतों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी होने की उम्मीद नहीं है। मानसून के कारण निर्माण कार्यों में आने वाली मंदी और दूसरी तरफ कच्चे माल व ईंधन की लगातार बढ़ती लागत ने सीमेंट कंपनियों के मुनाफे (मार्जिन) को बुरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछली तिमाही (Q1FY27) में देश के अलग-अलग क्षेत्रों में सीमेंट की कीमतों में केवल 2 से 3 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। यह बढ़ोतरी कंपनियों के बढ़े हुए ईंधन और पैकेजिंग खर्च की भरपाई करने के लिए भी पर्याप्त नहीं थी। अब मानसून की दस्तक के बाद डिमांड कमजोर पड़ने से कीमतों के स्थिर बने रहने का अनुमान है, जिससे कंपनियों को अपनी जेब से अतिरिक्त लागत उठानी पड़ सकती है।

पश्चिम एशिया के तनाव ने बढ़ाई कोयले और पेट कोक की कीमतें

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक सीमेंट उद्योग के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी इनपुट कॉस्ट (कच्चे माल की लागत) में हो रहा इजाफा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले और पेट कोक की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह बढ़ा हुआ खर्च चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सीमेंट कंपनियों के खाते में जुड़ चुका है, और कयास लगाए जा रहे हैं कि दूसरी तिमाही (Q2FY27) में ईंधन की यह लागत अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच जाएगी। इसके अतिरिक्त, पैकेजिंग और अन्य परिचालन खर्चों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने सीमेंट निर्माताओं के वित्तीय बोझ को और बढ़ा दिया है।

100 रुपये प्रति टन से ज्यादा घट सकता है कंपनियों का मार्जिन

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के विश्लेषण के अनुसार, लागत बढ़ने और मांग घटने के इस दोहरे असर के कारण सीमेंट कंपनियों की प्रति टन वेरिएबल कॉस्ट (परिवर्तनशील लागत) करीब 150 रुपये प्रति टन तक बढ़ सकती है। इसके अलावा, मानसून के कारण मांग में गिरावट (कम बिक्री) से होने वाले नुकसान की वजह से परिचालन लागत में भी करीब 50 रुपये प्रति टन का अतिरिक्त इजाफा हो सकता है। इन सब प्रतिकूल परिस्थितियों का सीधा असर सीमेंट उद्योग के मुनाफे पर पड़ेगा। अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में सीमेंट कंपनियों का मार्जिन पिछली तिमाही के मुकाबले 100 रुपये प्रति टन से भी ज्यादा गिरकर 880 रुपये प्रति टन से नीचे आ सकता है।

मानसून के बाद और साल के अंत तक सुधार की उम्मीद

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि जून के महीने में सीमेंट की मांग में कुछ सुधार देखा गया था। मई महीने में बुलेटिन धीमा रहने के बाद, मानसून के आगमन में थोड़ी देरी की वजह से जून में निर्माण गतिविधियों को गति मिली, जिससे बिक्री को थोड़ा सहारा मिला। ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि दूसरी तिमाही में मंदी रहने के बाद, वित्त वर्ष के दूसरे हिस्से (H2FY27) में सीमेंट सेक्टर में जोरदार वापसी हो सकती है। अगर पश्चिम एशिया का तनाव कम होता है, तो कोयले और पेट कोक की कीमतों में गिरावट आएगी, जिससे ईंधन और पैकेजिंग की लागत काफी हद तक घट जाएगी।

लंबे समय की मांग को लेकर बाजार अभी भी बेहद सकारात्मक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बुनियादी ढांचे के विकास और रियल एस्टेट सेक्टर की मजबूती के चलते सीमेंट की मांग मजबूत बनी रहेगी। लागत में संभावित गिरावट और मांग में आने वाले सुधार की बदौलत साल के उत्तरार्ध में सीमेंट कंपनियों के मुनाफे और मार्जिन में एक बार फिर शानदार रिकवरी देखने को मिल सकती है।

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