5 में से 4 मांगों पर बनी सहमति,प्रांतीय स्तर पर सरकार से बातचीत जारी,
वर्षाकाल में आरबीसी प्रकरण, नामांतरण, बंटवारा ठप, किसानों को हो रही परेशानी
कहा-भर्ती पटवारी के पद पर ही हुए, उसी पद सेवानिवृत्त होंगे?
फोटो
पदमेश न्यूज़।बालाघाट।वर्षों से लंबी अपनी विभिन्न पांच सूची मांगों को लेकर बालाघाट सहित प्रदेश भर के पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।तीन दिनों से जारी उनकी यह हड़ताल बुधवार को जारी रही। जहां पटवारी संघ द्वारा उनकी समस्त मांगों को पूरा किए जाने की गुहार लगाई गई है। हालांकि सरकार और पटवारी संघ के प्रतिनिधि मंडल के बीच 5 में से 4 मांगों पर सहमति बन चुकी है,लेकिन पटवारी संघ सभी पांचों मांगो को पूरा करने पर अड़ा हुआ है जिसको लेकर हड़ताल जारी है।आए दिनों की तरह ही बुधवार को जारी इस हड़ताल के दौरान जिला पटवारी संघ के पदाधिकारी तहसील कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन कर अपनी को लेकर जमकर नारेबाजी करते रहे जिन्होंने राजस्व के किसी भी काम को हाथ तक नहीं लगाया। जिसके चलते लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है
सरकार से नाराज चल रहे पटवारी,जिले के 600 पटवारी भी हड़ताल पर
सरकार की हर योजना को जमीन तक पहुंचाने वाले पटवारी इन दिनों खुद सरकार से नाराज हैं। आवेदन और निवेदन के बाद भी मांगे नहीं मानी जाने से बालाघाट जिले के 600 से अधिक पटवारियों ने काम बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। तहसील कार्यालय के सामने पंडाल लगाकर धरने पर बैठे पटवारियों की हड़ताल से न सिर्फ सरकारी कामकाज प्रभावित हो रहा है, बल्कि वर्षाकाल में किसानों और आम जनता को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कई तरह के कार्य हुए ढप
पटवारियों की इस हड़ताल से वर्षाकाल में सबसे ज्यादा जरूरी, काम ठप पड़ गए है। वर्तमान में वर्षाकाल चल रहा है। इस दौरान सर्पदंश, तेज बारिश से मकान गिरना या क्षतिग्रस्त होना जैसी आपदाओं में आरबीसी के तहत प्रकरण बनाकर पीड़ितों को आर्थिक सहायता दिलाने की सबसे अहम कड़ी पटवारी ही होते हैं। लेकिन हड़ताल के कारण ये प्रकरण पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं। इसके साथ ही नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, सीएम हेल्पलाइन सहित राजस्व से जुड़े सभी जरूरी काम भी ठप पड़े हैं। इससे किसान और आम नागरिक तहसीलों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
हड़ताल से जनता परेशान
पटवारियों के हड़ताल पर चले जाने से जिले की सभी तहसीलों में राजस्व संबंधी काम प्रभावित हो रहे हैं। खेत की नाप-जोख, सीमांकन, फौती नामांतरण, ऋण पुस्तिका जैसे काम रुकने से किसान परेशान हैं। वहीं आरबीसी के प्रकरण लंबित होने से आपदा प्रभावित परिवारों को समय पर मदद नहीं मिल पा रही है।पटवारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मुख्य मांग पूरी नहीं होती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। अब देखना होगा कि सरकार पटवारियों की इस जायज मांग पर कब तक निर्णय लेती है।
5 में से 4 मांगों पर सहमति, मुख्य मांग अटकी
जिलाध्यक्ष बिरनवार ने कहा कि हम काम बंद नहीं करना चाहते, लेकिन मजबूरी में हड़ताल करनी पड़ रही है। प्रांतीय नेतृत्व की सरकार से लगातार बातचीत चल रही है। पांच मांगों में से चार मांगों पर सरकार सहमत हो गई है और उनमें से दो मांगों के आदेश भी जारी हो चुके हैं। लेकिन सबसे प्रमुख मांग समयमान वेतनमान और पदोन्नति को लेकर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है। इसी कारण हड़ताल जारी रखने का निर्णय लिया गया है।
पदोन्नति नहीं, इसलिए सड़कों पर उतरे पटवारी
मध्यप्रदेश पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष अरुण बिरनवार ने बताया कि हर विभाग में भर्ती के बाद पदोन्नति की प्रक्रिया होती है, लेकिन पटवारी एकमात्र ऐसा पद है जहां व्यक्ति भर्ती भी पटवारी के पद पर होता है और सेवानिवृत्त भी उसी पद से होता है। जबकि तहसील के चपरासी तक प्रमोशन पाकर बाबू और नायब तहसीलदार तक पहुंच जाते हैं।इसी विसंगति को दूर करने के लिए पटवारी लंबे समय से “समयमान वेतनमान” की मांग कर रहे हैं। जिलाध्यक्ष ने बताया कि पटवारी आरआई और नायब तहसीलदार के पद तक प्रमोट हो सकते हैं, लेकिन 2018 के बाद से नायब तहसीलदार के लिए कोई परीक्षा नहीं हुई है और न ही आरआई के पद के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। इसी वजह से पटवारियों का भविष्य अंधकार में है।
000000000000000000000000










































