नई दिल्ली: सरकार जल्दी ही यूपीआई मर्चेंट पेमेंट पर फीस लगा सकती है। लोकसभा ने टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल 2026 को हरी झंडी दे दी है। इससे सरकार को UPI ट्रांजैक्शंस पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या चार्ज लगाने का अधिकार मिल गया है। इस बीच देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने का कहना है कि यूपीआई से ऑपरेटिंग कॉस्ट का पता लगाना मुश्किल है क्योंकि यह एक साझा इन्फ्रास्ट्रक्चर है।
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक शेट्टी ने कहा कि UPI की वजह से बैंक के IT सिस्टम पर ट्रांजैक्शन का बोझ बढ़ने से ऑपरेटिंग कॉस्ट में कितनी बढ़ोतरी हुई है, इसका सही-सही हिसाब लगाना मुमकिन नहीं है। उन्होंने कहा, “कॉस्ट के मामले में, हम खास तौर पर इसका हिसाब नहीं लगा सकते क्योंकि ज्यादातर इन्फ्रास्ट्रक्चर शेयर्ड होता है। आप यह तय नहीं कर सकते कि यह कॉस्ट UPI की वजह से हो रही है।”
यूपीआई पेमेंट में हिस्सेदारी
उनसे पूछा गया था कि क्या UPI ट्रांजैक्शन के लिए मर्चेंट से चार्ज लेने की चर्चाओं के बीच बैंकों पर पड़ने वाली अतिरिक्त ऑपरेटिंग कॉस्ट का पता लगाया जा सकता है। एसबीआई के चेयरमैन ने कहा कि पेमेंट के क्षेत्र में बैंकों के ऐप्स की हिस्सेदारी कम है क्योंकि वे पेमेंट के मामले में मौका चूक गए और अब खोई हुई जमीन वापस पाना बहुत मुश्किल है।
उन्होंने कहा कि एसबीआई अपने ग्राहकों को UPI पेमेंट के लिए अपने Yono ऐप पर लाने की कोशिश कर रहा है और उसे अच्छा रिस्पॉन्स भी मिल रहा है। लेकिन यह अब भी मार्केट लीडर Google Pay और PhonePe से काफी पीछे है। NPCI के डेटा के मुताबिक, एसबीआई ने जून 2026 में 631.6 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन दर्ज किए। इनमें से सिर्फ 2.3 करोड़ ट्रांजैक्शन उसके अपने ऐप्स के जरिए किए गए।










































