जबलपुर जिला चिकित्सालय में शिशु रोग विशेषज्ञ के रूप में थे पदस्थ,
बैहर-बिरसा में बच्चों की मौत और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार को बताया प्राथमिकता,
बालाघाट में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के पद को लेकर चल रही उठापटक के बीच आखिरकार स्वास्थ्य विभाग ने नए सीएमएचओ की नियुक्ति कर दी है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा 6 सितंबर को जारी आदेश के तहत जबलपुर जिला चिकित्सालय में शिशु रोग विशेषज्ञ के पद पर पदस्थ डॉ. शत्रुघ्न सिंह दाहिया को बालाघाट का मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नियुक्त किया गया है। डॉ. शत्रुघ्न सिंह दाहिया वर्तमान में जबलपुर जिला चिकित्सालय में शिशु रोग विशेषज्ञ के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। शासन के आदेश के बाद अब उन्हें बालाघाट जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। सीएमएचओ के रूप में उनके सामने जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक चिकित्सा सुविधाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने की चुनौती होगी।
गौरतलब है कि बालाघाट सीएमएचओ के पद को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिल रहा था। करीब चार दिन पहले जारी आदेश में विभाग ने तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. परेश उपलव को पद से हटाया था। इसके बाद बालाघाट सीएमएचओ का प्रभार डॉ. मनोज पांडे को सौंपा गया था। हालांकि डॉ. मनोज पांडे ने 5 सितंबर तक बालाघाट पहुंचकर पदभार ग्रहण नहीं किया था। बताया जा रहा था कि उन्हें डिंडोरी जिले से रिलीव नहीं किया गया था, जिसके कारण वे बालाघाट में सीएमएचओ का प्रभार नहीं संभाल पाए। इसी बीच स्वास्थ्य विभाग ने अचानक 6 सितंबर को नया आदेश जारी कर डॉ. शत्रुघ्न सिंह दाहिया को बालाघाट की जिम्मेदारी सौंप दी। डॉ. दाहिया ने दूरभाष पर पद्मेश न्यूज़ से चर्चा में बताया कि उन्हें 6 सितंबर को शाम करीब 4:30 बजे भोपाल से विभाग की ओर से दूरभाष पर जानकारी दी गई कि उन्हें बालाघाट जिले का मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि इसके पहले भी बालाघाट में पदस्थापना को लेकर उनके नाम की चर्चा चल रही थी, लेकिन बाद में डॉ. मनोज पांडे को प्रभार दिए जाने की जानकारी सामने आई थी। डॉ. दाहिया ने बताया कि वे मूल रूप से जबलपुर के रहने वाले हैं और स्वास्थ्य विभाग में विभिन्न जिम्मेदारियों पर कार्य कर चुके हैं। उन्होंने डिंडोरी जिले में करीब 12 वर्षों तक सेवाएं दी हैं। लंबे समय तक आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्र में काम करने के अनुभव को देखते हुए अब बालाघाट की जिम्मेदारी उनके लिए नई चुनौती होगी। उन्होंने बताया कि वे 7 सितंबर को दोपहर करीब 12:30 बजे बालाघाट पहुंचकर सीएमएचओ का पदभार ग्रहण करेंगे। पदभार संभालने के बाद उनका पहला प्रयास जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को समझना होगा। इसके बाद वे जिले के अलग-अलग क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी स्थिति की जानकारी लेने की बात कह रहे हैं। डॉ. शत्रुघ्न सिंह दाहिया ने विशेष रूप से बैहर-बिरसा क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां बच्चों की मौत का मामला गंभीर है। वे क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को समझने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम करेंगे। उनका कहना है कि दूरस्थ क्षेत्रों में लोगों को बेहतर और समय पर चिकित्सा सुविधा मिलना बेहद जरूरी है। बैहर-बिरसा क्षेत्र में पिछले कुछ समय से बच्चों की मौत के मामले लगातार चर्चा में हैं। मलेरिया और अन्य मौसमी बीमारियों के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में नए सीएमएचओ के सामने बीमारी की रोकथाम, समय पर जांच और उपचार, स्वास्थ्य अमले की सक्रियता तथा ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती होगी। डॉ. दाहिया ने कहा कि पदभार ग्रहण करने के बाद सबसे पहले वे जिले को समझने का प्रयास करेंगे। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और मैदानी अमले के साथ समन्वय कर समस्याओं को चिन्हित किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि प्राथमिकता केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नए सीएमएचओ की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। एक ओर बैहर-बिरसा क्षेत्र में बच्चों की मौत का मामला संवेदनशील बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य…










































