पूर्व कलेक्टर की भी तय की जाए जवाबदेही
एक करोड़ मुआवजा, 25 लाख अंतरिम सहायता और स्वतंत्र जांच समिति की मांग,
15 सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर आंदोलन की चेतावनी
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पदमेश न्यूज़।बालाघाट। बैहर-बिरसा क्षेत्र के कुंडेकसा और आसपास के आदिवासी गांवों में बच्चों की मौत का मामला एक बार फिर गरमा गया है। स्वास्थ्य संकट के दौरान प्रशासनिक व्यवस्थाओं और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी को 15 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया है। भीम आर्मी एकता मिशन एवं आजाद समाज पार्टी कांशीराम द्वारा सौपे गए ज्ञापन में मामले की उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र जांच कराने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत देने और उस दौरान पदस्थ अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।वही मांग पूरी ना होने पर उन्होंने सड़क पर उतरकर आंदोलन किए जाने की चेतावनी दी है।
1 करोड़ का दिया जाए मुआवजा
ज्ञापनकर्ताओं ने क्षेत्र में करीब 30 आदिवासी बच्चों की मौत का दावा करते हुए प्रत्येक मृत बच्चे के परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता तथा तत्काल 25 लाख रुपये की अंतरिम सहायता देने की मांग की है। साथ ही पूरे मामले की जांच स्वतंत्र चिकित्सा विशेषज्ञों एवं उच्चस्तरीय अधिकारियों की समिति से कराने की मांग रखी गई है।
पूर्व कलेक्टर की भूमिका की जांच की मांग
ज्ञापन में तत्कालीन कलेक्टर मृणाल मीना की प्रशासनिक भूमिका की भी जांच कराने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है। ज्ञापनकर्ताओं का कहना है कि स्वास्थ्य संकट के दौरान प्रभावित गांवों की निगरानी, स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा, डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य कर्मचारियों की उपलब्धता, दवाइयों, जांच सुविधाओं, एंबुलेंस तथा आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन ने क्या कदम उठाए, इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
लापरवाही बरतने वालो पर हो कार्यवाही
ज्ञापन में कहा गया है कि यदि जांच में प्रशासनिक लापरवाही अथवा कर्तव्य में गंभीर चूक सामने आती है तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही घटना के समय प्रभावित क्षेत्रों में तैनात डॉक्टरों, एएनएम, स्वास्थ्य अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की मांग की गई है।
गांववार मौत का आंकड़ा और मृत्यु का कारण सार्वजनिक हो
ज्ञापनकर्ताओं ने मृत बच्चों की आधिकारिक संख्या गांववार सार्वजनिक करने की मांग की है। प्रत्येक मृत बच्चे की उम्र, बीमारी, उपचार, जांच रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड और मृत्यु के वास्तविक कारण की स्वतंत्र चिकित्सा विशेषज्ञ समिति से जांच कराने की मांग भी की गई है।उनका कहना है कि बच्चों की मौत के मामले को केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। प्रत्येक मौत के पीछे की परिस्थितियों और स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने आनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
घर-घर स्वास्थ्य जांच, 24 घंटे एंबुलेंस की मांग
15 सूत्रीय मांगों में कुंडेकसा और आसपास के गांवों में विशेष स्वास्थ्य अभियान चलाने की मांग की गई है। इसके तहत घर-घर स्वास्थ्य जांच, मलेरिया और खसरा जांच, टीकाकरण का सत्यापन तथा संक्रामक बीमारियों की स्क्रीनिंग कराने की मांग रखी गई है।प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त डॉक्टर, एएनएम, नर्सिंग स्टाफ, दवाइयां और जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ 24 घंटे एंबुलेंस एवं आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है।
कुपोषण और आंगनवाड़ी व्यवस्था की हो जांच
ज्ञापन में बच्चों की पोषण स्थिति की विशेष जांच कराने और गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को तत्काल उपचार, पौष्टिक आहार एवं आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई है। आंगनवाड़ी केंद्रों और विद्यालयों में मिलने वाले पोषण आहार, स्वास्थ्य सुविधाओं तथा सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की भी जांच कराने की मांग उठाई गई है। इसके अलावा प्रभावित गांवों के पेयजल स्रोतों की जांच कर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने तथा सड़क, बिजली, शिक्षा सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं में सुधार की मांग की गई है।
विधायक और स्वास्थ्य मंत्री की जवाबदेही तय करने की मांग
ज्ञापन में प्रभावित क्षेत्र के विधायक और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री की भी जवाबदेही तय करने की मांग की गई है। ज्ञापनकर्ताओं का आरोप है कि गंभीर स्वास्थ्य संकट के दौरान ग्रामीणों की समस्याओं का समय पर प्रभावी समाधान नहीं हो सका। इसी आधार पर संबंधित जनप्रतिनिधियों की नैतिक एवं










































