नए लेबर कोड के तहत एक तय ग्रेड के नीचे के कर्मचारियों को खासा फायदा मिल सकता है। उन्हें उनकी बेसिक सैलरी का 20% तक बोनस मिल सकता है। जानें किन कर्मचारियों को यह फायदा मिल सकता है?Bonus and Basic Salary Rule : नए लेबर कोड में कर्मचारियों के लिए बोनस के नियम तय किए गए हैं। इन नियमों के तहत कर्मचारियों को अच्छा खासा बोनस मिलत सकता है। कंपनियां बोनस की गणना मनमाने तरीके से नहीं करें, इसके लिए श्रम और रोजगार मंत्रालय ने पिछले दिनों दो नोटिफिकेशन जारी किए हैं। इन नोटिफिकेशन में बताया गया है कि किस तरह से बोनस की गणना की जाएगी।
किसे मिलेगा बोनस?
नए लेबर कोड के तहत बोनस की विधिक पात्रता तय की गई है। इसके तहत 21000 या इससे कम बेसिक सैलरी वाले कर्मचारी बोनस के दायरे में आएंगे। इसके साथ ही नोटिफिकेशन में यह भी साफ किया गया है कि बोनस की गणना पूरी सैलरी पर नहीं होगी। बल्कि, कर्मचारी की बेसिक सैलरी के आधार पर की जाएगी।
कम से कम कितना बोनस?
लेबर कोड के मुताबिक पात्र कर्मचारियों को उनकी बेसिक सैलरी के हिसाब से न्यूनतम 8.33% और अधिकतम 20% तक बोनस दिया जा सकता हैकब जारी किए नोटिफिकेशन?
श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 25 अगस्त दो नोटिफिकेशन जारी किए। इनमें बताया गया है कि बोनस के लिए सैलरी की क्या पात्रताएं होंगी। इसके अलावा पात्र कर्मचारियों का बोनस किस अमाउंट पर तय किया जाएगा। दोनों नोटिफिकेशन के प्रावधानों को 21 नवंबर, 2025 से प्रभावी माना गया है। यानी पिछले साल के आधार पर कर्मचारियों को बोनस मिल पाएगा।
किन कर्मचारियों को मिलेगा बोनस?
कोड ऑन वेजेस, 2019 की धारा 26 के मुताबिक, ऐसा कर्मचारी जिसने अकाउंटिंग ईयर में कम से कम 30 दिन काम किया है और जिसकी मासिक वेज निर्धारित सीमा से ज्यादा नहीं हैं। हालांकि, इसका यह जरूरी नहीं है कि 21 हजार से ज्यादा बेसिक सैलरी वालों को बोनस नहीं दिया जा सकता है। इन नियमों का मतलब सिर्फ न्यूनतम और अधिकतम बोनस की रकम तय करना है।
कंपनी को कब तक देना होगा बोनस?
कोड ऑन वेजेज की धारा 39 के मुताबिक कंपनी को बोनस की राशि अकाउंटिंग ईयर खत्म होने के 8 महीने के भीतर कर्मचारी के बैंक खाते में जमा करनी होगी। हालांकि, पर्याप्त कारण होने पर कर्मचारी सरकार या निर्धारित प्राधिकरण से एक्सटेंशन मांग सकती है। यह अवधि 2 साल तक हो सकती है।
क्या बोनस लेना कानूनी हक?
वेज कोड की धरा 45 के तहत बोनस रिकवरी के लिए उपयुक्त प्राधिकरण के सामने क्लेम किया जा सकता है। यह क्लेम खुद कर्मचारी, उसके रजिस्टर्ड ट्रेड यूनियन या इन्सपेक्टर की तरफ से किया जा सकता है। इसके अलावा एक ही कंपनी के कई कर्मचारियों के दावों को एक साथ क्लब किया जा सकता है।










































