अष्टविनायक गणेश उत्सव समिति की अनूठी पहल, किताबों और विद्यार्थियों की झलक के बीच दिया हर बच्चे को शिक्षा का संदेश,
जिले में इन दिनों गणेश उत्सव का रंग पूरी तरह चढ़ा हुआ है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक जगह-जगह भगवान गणेश की प्रतिमाएं विराजित की गई हैं और शाम होते ही गणेश पंडालों में आरती, रोशनी और धार्मिक आयोजनों से उत्सव का माहौल दिखाई दे रहा है। सार्वजनिक समितियों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपने घरों में भी गणेश प्रतिमाओं की स्थापना की है। इसी बीच शहर के वार्ड क्रमांक 28 और 30 स्थित सरस्वती नगर में अष्टविनायक गणेश उत्सव समिति ने गणेश उत्सव को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए शिक्षा का संदेश देने वाली अनूठी थीम तैयार की है।
\समिति ने इस बार भगवान गणेश की प्रतिमा को विद्यार्थी के स्वरूप में विराजित किया है। प्रतिमा के आसपास स्कूल में अध्ययन करते बच्चों की छायाकृतियां, पुस्तकों और ग्रंथालय जैसी साज-सज्जा के माध्यम से ऐसा वातावरण तैयार किया गया है, जो पंडाल में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। यहां गणेश प्रतिमा के पीछे बनाई गई पूरी थीम शिक्षा पर केंद्रित है और पंडाल से गुजरने वाला हर व्यक्ति कुछ पल रुककर इस अनूठी प्रस्तुति को देखता नजर आ रहा है। अष्टविनायक गणेश उत्सव समिति के जिला अध्यक्ष अनमोल सिंह वासु ने बताया कि समिति ने इस बार जानबूझकर गणेश प्रतिमा के लिए ऐसी थीम चुनी है, जिसके माध्यम से समाज तक एक सकारात्मक संदेश पहुंचाया जा सके। उनका कहना है कि गणेश उत्सव आस्था और श्रद्धा का पर्व है, लेकिन इसी पर्व के माध्यम से समाज से जुड़े जरूरी विषयों पर संदेश देने का प्रयास भी किया जा सकता है। इसी सोच के साथ समिति ने भगवान गणेश को विद्यार्थी के रूप में स्थापित करने का निर्णय लिया। पंडाल में गणेश प्रतिमा के दोनों ओर विद्यार्थियों के अध्ययन करने जैसी छायाकृतियां बनाई गई हैं। वहीं पीछे की ओर पुस्तकों और ग्रंथालय की थीम तैयार की गई है। पंडाल की पूरी सजावट को इस तरह आकार दिया गया है कि भगवान गणेश के विद्यार्थी स्वरूप के साथ शिक्षा का महत्व भी दिखाई दे। समिति का उद्देश्य है कि पंडाल में आने वाले बच्चों, युवाओं और अभिभावकों के बीच शिक्षा को लेकर सकारात्मक सोच विकसित हो। समिति अध्यक्ष अनमोल सिंह वासु ने कहा कि उनका संदेश स्पष्ट है कि देश का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। हर बच्चे को स्कूल जाने का अवसर मिलना चाहिए और प्रत्येक बच्चे में छिपी प्रतिभा को पहचानकर उसे आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल गणेश उत्सव मनाना ही समिति का उद्देश्य नहीं है, बल्कि धार्मिक आयोजन के साथ समाजहित से जुड़ा कोई संदेश लोगों तक पहुंचाना भी जरूरी है। सरस्वती नगर में तैयार किया गया यह पंडाल इन दिनों लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। विशेष रूप से बच्चे और युवा यहां तैयार की गई शिक्षा आधारित थीम को रुचि के साथ देख रहे हैं। पंडाल की सजावट में धार्मिक आस्था के साथ शिक्षा को जोड़ने का प्रयास दिखाई दे रहा है, जिसके कारण यह अन्य सामान्य गणेश पंडालों से अलग नजर आ रहा है। समिति का कहना है कि गणेश उत्सव के दौरान हर साल अलग-अलग सामाजिक संदेशों को सामने लाने का प्रयास किया जा सकता है। इसी कड़ी में इस बार शिक्षा को केंद्र में रखा गया है। समिति के पदाधिकारियों के अनुसार इस पहल के पीछे किसी व्यक्ति, समाज या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई उद्देश्य नहीं है। इसका मकसद केवल बच्चों की शिक्षा और उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने का सकारात्मक संदेश समाज तक पहुंचाना है।
गणेश उत्सव के दौरान जहां शहर के काली पुतली चौक, भटेरा, बूढ़ी सहित विभिन्न वार्डों में आकर्षक पंडाल और विद्युत सजावट श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है, वहीं सरस्वती नगर का यह शिक्षा आधारित गणेश पंडाल धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक संदेश के लिए चर्चा में है।










































